
प्रदेश मे नगरीय निकाय चुनाव के पहले राजनीतिक पार्टियों में टिकट के लिए घमासान

कांग्रेस: राजीव भवन का गेट बंद करना पड़ा
भाजपा: दो गुट भिड़े थाने पहुंचा मामला
देर रात कांग्रेस और भाजपा ने कई प्रत्याशियों की सूची जारी की
प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव से पहले राजनीितक पािर्टयों में टिकट के लिए घमासान छिड़ गया है। दरअसल चुनाव के नामांकन के लिए 06 दिसंबर आखिरी तारीख है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने अब तक सभी सीटों के प्रत्याशियों के नाम का ऐलान नहीं किया है। यही वजह है कि कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन और भाजपा मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे और एकात्म परिसर में दावेदारों की भीड़ जमा रहा। दोनों ही दलों में वार्डों के परिसीमन के बाद जो स्थिति बनी है, उसमें बाहरी प्रत्याशियों के खिलाफ काफी विरोध है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया मंगलवार को जब प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे तो इतनी संख्या में दावेदार पहुंच गए कि गेट भी बंद करना पड़ा। इनमें पं.श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड के कार्यकर्ता थे, जो बाहरी प्रत्याशी के विरोध में नारेबाजी करते हुए पहुंचे थे। वहीं राजीव भवन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रभारी पुनिया की मौजूदगी में बस्तर,सरगुजा, महासमुंद और राजनांदगांव के नगर पालिका और नगर पंचायत के उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिए गए हैं।कांग्रेस ने बस्तर संभाग के सभी प्रत्यािशयों की सूची जारी कर दी है। रायपुर-बिलासपुर समेत सभी नगर निगमों के उम्मीदवारों के नाम बुधवार को तय किए जाएंगे।

गूंज रहा निकाय चुनाव की रणभेरी शंख, अपनी डफली अपना राग से बिगड़ रहा चुनावी सुर-ताल

निकाय चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष से उम्मीदवारों के बीच हो रहे रस्साकशी के बीच नामांकन की अंतिम तिथि तक चार वार्डों में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रहा।

वहीं भाजपा के पास तो प्रत्याशियों के टोटे भी पड़ गए।

मंत्री के गृहनगर खरसिया का चुनावी रण में अब दोनों ही प्रमुख पार्टियों द्वारा अपने-अपने चक्रव्यूह रचना रच रहे हैं। ऐसे में अपनी-अपनी डफली पर अपने-अपने राग अलापते हुए सभी गुट पूरी ताकत से जोर आजमाइश कर रहे हैं। मंत्री पटेल के नियंत्रण से गुटों में बटने के पूर्व ही कार्यकर्ताओं पर बेहतर ताल-मेल बना इसी तरह नियंत्रण रख ग्रामीण क्षेत्र के सिपाह सलारो को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे चुनावी कमान दे निपुणता के साथ सफलता तक पहुंच ही जाएंगे लोगों में हो रहा है चर्चा,
संगठन की रणनीति से वाकिफ निगम के अनुभवी दावेदार सूची घोषित होने से पहले ही नामांकन पत्र खरीद कर बैठे हैं इसका सीधा आशा यह है कि उन्हें यदि पार्टी से टिकट नहीं मिलता है तो निर्दलीय चुनाव लड़ना तय है वहीं विपक्ष का बिखराव साफ तौर पर लोगों को नजर आ रहा है।

वहीं चर्चा इस बात पर भी हो रहा है कि भले ही सत्ता पक्ष के पार्षदों का बहुमत मिल जाए, परंतु अप्रत्यक्ष रूप से हो चयनित रहे अध्यक्ष पद के लिए उनके पास दमदार चेहरा नहीं।

हालांकि सत्ता पक्ष पूरे भरोसे और उत्साह एकजुटता के साथ निकाय चुनाव के रण के लिए तैयार दिख रहे है।

अप्रत्यक्ष चुनाव से बिगड़ा सारा गणित
इस बार निगमों के मेयर और नगर पालिका व पंचायतों के अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष पद्धति से होना है। इस वजह से सियासी समीकरण गड़बड़ा गया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों के दलों के मेयर पद के दावेदार अपने लिए वार्ड की तलाश कर रहे हैं। इन वार्डों में पिछले पांच साल से सक्रिय पार्षद या दावेदार उनके लिए वार्ड छोड़ने तैयार नहीं हैं। राजधानी में तो कई बड़े नेता ही वार्डों में विरोध का सामना कर रहे हैं। परिसीमन और आरक्षण ने भी कई नेताओं को अपने ही वार्ड में पराया बना दिया है।
चुनाव में बगावत की पूर्ण आशंका
प्रदेश में यह पहला मौका है, जब नगरीय निकाय चुनाव के समय कांग्रेस की सरकार है और भाजपा विपक्ष में है। दोनों ही दलों में कार्यकर्ताओं को काफी उम्मीद है। इस वजह से दावेदारों की संख्या काफी ज्यादा है। एक ही वार्ड में एक दर्जन दावेदार हैं। इन कारण चुनाव में विस्फोटक स्थिति बन सकता है।
कुम्हारी में कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट
दूसरी ओर,कुम्हारी में बीजेपी के दो गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट के बाद थाने तक मामला पहुंच गया। दिग्गज नेताओं के समर्थकों के बीच इस झगड़े ने पार्टी को भी चिंता में डाल दिया है। दावेदारों में घमासान को देखते हुए बीजेपी ने अब चार दिसंबर को प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करना तय किया है।
अायोग ने पार्षद चुनाव के लिए बनाई सामान की रेट लिस्ट, अधिकतम खर्च सीमा 05 लाख रु.

बाजार में समोसा 10 से 15 रु., लेकिन चुनावी समोसा 08 रु.का
बाजार में समोसे के दाम भले ही 10 से 15 रुपए तक हो गए हैं। लेकिन आयोग ने पार्षद प्रत्याशियों के चुनाव खर्च के लिए बनाए गए रेट कार्ड में इसके दाम 08 रुपए ही निर्धारित किए हैं। नगरीय चुनाव में पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च का रेट कार्ड तय कर दिया है। प्रदेश के हर जिले में वहां की बाजार मूल्यों के हिसाब से खाने पीने से लेकर पंडाल और बैनर झंडे टोपियों के दाम तय किए गए हैं। इस लिस्ट के जरिए ही प्रत्याशियों के चुनाव खर्च का हिसाब किताब तय होगा। पहली बार प्रदेश में पार्षद अपने चुनाव खर्च के हिसाब किताब का लेखाजोखा रखेंगे। पार्षदों के चुनाव खर्च की सीमा पांच लाख निर्धारित की गई है। इस सीमा में ही उन्हें अपने वार्डों में प्रचार पर खर्च करना होगा। इस सीमा के बाहर खर्च करने पर प्रत्याशी को अयोग्य तक ठहराया जा सकता है। हालांकि बहुत सी सामग्रियों के दाम बाजार मूल्य से कम हैं जबकि कुछ ऐसी भी हैं। इसके दाम प्रचलित कीमतों से ज्यादा निर्धारित कर दिए गए हैं। आयोग की प्रचलित परिपाटी के मुताबिक जिला निर्वाचन अधिकारी चुनाव के लिए रेट कार्ड बनाने से पहले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करते हैं, जिसके आधार पर ही रेट लिस्ट का निर्धारण किया जाता है। वार्ड का दायरा विधानसभा क्षेत्र या लोकसभा क्षेत्र की तुलना में बहुत ज्यादा कम होता है। यही नहीं खर्च की सीमा भी पार्षद प्रत्याशियों के लिए बेहद कम है। लेकिन पार्षद प्रत्याशियों के रेट कार्ड में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों के रेट लिस्ट में मामूली सा ही अंतर है।
10 हजार रुपए में बनेगा हेलिपेड
पार्षद प्रत्याशी प्रचार के लिए ऐसे व्यक्ति को बुलाते हैं, जो हेलिकॉप्टर से आता है। तो इसके हेलिपेड को बनाने के लिए आयोग ने 10 हजार रुपए का खर्च निर्धारित किया है। प्रचार सभा या चुनाव कार्यालय में दरी या चटाई का रेट 3 रुपए प्रति वर्ग फुट रोजाना की दर से लगाया जा रहा है। वार्ड में घूमने के लिए अगर उम्मीदवार चौपहिया वाहन का इस्तेमाल करता है तो इसके लिए डीजल खर्च छोड़कर 1 हजार रुपए से लेकर ढ़ाई हजार रुपए रोजाना की दर से लगाया गया है।
टोपी-गमछे 25 और10 का दुपट्टा
समर्थकों के टोपी गमछे बिल्ले वगैरह के रेट भी तय किए गए हैं। टीशर्ट की कीमत जहां 60 रुपए प्रतिनग लगाई गई है। वहीं टोपी और गमछे का दाम 25 रुपए रखा गया है। प्रचार में झंडियों की तोरण लगाने के लिए प्रति व्यक्ति 400 रुपए की मजदूरी फिक्स की गई है। दो घंटे के राउत नाचा या म्यूजिक के साथ प्रचार के लिए 10 हजार रुपए निर्धारित हैं। मेटल का एक बिल्ला 25 रुपए का और कागज के एक हजार बिल्लों के लिए 100 रुपए की दर है।
पार्षद जी का खर्च कार्ड
सामग्री – दर
चाय (फुल) – 08 रुपए
काफी (फुल)- 20 रुपए
समोसा, आलू गोंडा, कचौड़ी (प्रतिनग) – 8 रुपए
आलू पोहा (प्रति प्लेट) – 15 रुपए
मिक्चर (50 ग्राम) – 05 रुपए
जलेबी (50 ग्राम) – 05 रुपए
पूड़ी सब्जी (5 नग पुड़ी प्रति प्लेट) – 30 रुपए
पानी की बोतल (1 लीटर) – 15 रुपए
जनरल थाली – 65 रुपए
नार्मल थाली – 80 रुपए
स्पेशल थाली – 120 रुपए
केसर लस्सी (प्रति गिलास) – 30 रुपए
शरबत (प्रति गिलास) – 10 रुपए
पेपर पैक फ्रूटी – 15 रुपए
कोल्ड ड्रिंक (200 एमएल) – 18 रुपए
पानी की बोतल (1 लीटर) – 15 रुपए
कुर्सी – 6 रुपए प्रतिनग, रोजाना
वीआईपी कुर्सी – 85 रुपए प्रतिनग, रोजाना
सोफा थ्री सीटर – 400 रुपए प्रतिनग, रोजाना
लोक चुनाव के रेट कार्ड से ज्यादा थालियों के दाम
थाली – लोक सभा चुनाव में दाम
जनरल – 50 रुपए
नार्मल – 75 रुपए
स्पेशल – 100 रुपए




