
चपले की पावन धरा दे रही भक्ति-रस का मधुर निमंत्रण,
पधारिए रसिकजन,हनुमत कथा में डूबे प्रेम, श्रद्धा और समर्पण॥
खरसिया।धन्य धरा चपले ग्राम में 28 मई से 03 जून तक श्री हनुमान कथा का सात दिवसीय आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। हर वर्ष कि भांति इस भी भक्ति का बयार बहेगा श्रीमद्भागवत कथा,शिव पुराण,श्री राम कथा के पश्चात अपने 15वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। कथा वाचन पूज्य साध्वी राधा किशोरी जी द्वारा किया जाएगा,

जिसमें क्षेत्र सहित दूर-दराज से श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
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चपले में आयोजित यह हनुमान कथा पिछले डेढ़ दशक में एक स्थायी धार्मिक परंपरा के रूप में विकसित हुई है। “करने वाला हनुमान, कराने वाला हनुमान” की अवधारणा पर आधारित यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित है, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है।
कथा के दौरान हनुमान जी के जीवन प्रसंगों—भक्ति, पराक्रम, विनम्रता और सेवा—का वर्णन किया जाता है। जैसे रामचरितमानस की चौपाई “राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ विश्राम” उनके जीवन के मूल सिद्धांत को रेखांकित करती है, वहीं सुरसा प्रसंग विवेक और धैर्य के महत्व को दर्शाता है।
ऐसे धार्मिक आयोजनों का प्रभाव केवल आध्यात्मिक नहीं,बल्कि सामाजिक स्तर पर भी दिखाई देता है।
सामूहिक सहभागिता से गांव और आस-पास के क्षेत्रों में आपसी संबंध मजबूत होते हैं।निरंतर आयोजन स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को संरक्षित रखने में भूमिका निभाते हैं।कथा के माध्यम से नैतिकता,अनुशासन और सेवा भाव जैसे मूल्यों का संचार होता है।

श्री हनुमान जी के जीवन से जुड़े प्रसंग—जैसे सुरसा और सिंहिका का सामना—यह संकेत देते हैं कि जीवन में चुनौतियों का समाधान केवल बल से नहीं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार रणनीति,साहस और निर्णय क्षमता से संभव है।
अविरल 15 वर्षों से हो रहा यह आयोजन आने वाले समय में और व्यापक स्वरूप ले सकता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी इसे क्षेत्रीय स्तर से आगे बढ़ाकर बड़े धार्मिक मंच में परिवर्तित कर सकती है।

चपले ग्रामवासी,क्षेत्रवासियों ने अधिकाधिक संख्या में श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील की है। कथा के माध्यम से भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश व्यापक स्तर पर प्रसारित होगा,जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सकारात्मकता को और बल मिलेगा।



