खरसिया क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र में नियमों कानून को ताक में रख कर प्राकृतिक जल, स्रोत के साथ भू-जल के अंधाधुंध दोहन को लेकर जल संकट की आशंका व्यक्त की जा रही है। क्षेत्र में बढ़ते भू-जल उपयोग पर रोक लगाने और औद्योगिक इकाइयों द्वारा निर्धारित नियमों के तहत जल उपयोग सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
स्थानीय स्तर पर लगातार भू-जल स्तर गिरने की शिकायतें सामने आ रही हैं। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ जल की मांग बढ़ी है,जिससे क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित दोहन से भविष्य में गंभीर जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
यदि समय रहते भू-जल उपयोग पर नियमन नहीं किया गया तो क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने,कृषि पर असर पड़ने और पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ने की संभावना है।औद्योगिक इकाइयों पर नियमानुसार जल उपयोग लागू करना जल संरक्षण और संसाधन संतुलन के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि औद्योगिक घरानों के जल उपयोग की निगरानी बढ़ाई जाए और भू-जल संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं,ताकि भविष्य में क्षेत्र को संभावित जल संकट से बचाया जा सके।




