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खरसिया में सूखती नहरें,रबी फसल पर संकट की आशंका: जल आपूर्ति की मांग को लेकर 23 फरवरी को एसडीएम को ज्ञापन-मनोज गबेल

खरसिया। खरसिया क्षेत्र में रबी फसल के अंतिम चरण के दौरान सिंचाई जल की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। सूखती नहरों, क्षेत्र में घटते जलस्तर और कमजोर होते जल स्रोतों के कारण किसानों की खड़ी फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति को संभावित जल संकट मानते हुए क्षेत्रीय विधायक उमेश पटेल ने इसे तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप का विषय बताया है। खरसिया ब्लॉक कांग्रेस कमेटी (शहरी एवं ग्रामीण) ने 23 फरवरी को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर नहरों में तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग करने का निर्णय लिया है।

ब्लॉक कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष मनोज गबेल के अनुसार,कुछ सप्ताह पहले तक जिन खेतों में फसलें अच्छी स्थिति में थीं, वे अब सिंचाई के अभाव में प्रभावित हो रही हैं। रबी फसल के अंतिम चरण में पानी की कमी से उत्पादन घटने का जोखिम बढ़ गया है।

ज्ञापन के माध्यम से बांगो नहर तथा आंडपथरा डेम मांड नहर से जल प्रवाह तत्काल शुरू करने की मांग रखी जाएगी। संगठन का कहना है कि नहरों में पानी छोड़े जाने से खेतों तक सिंचाई पहुंचेगी, साथ ही तालाबों का पुनर्भरण और भू-जल स्तर को भी सहारा मिलेगा।


खरसिया क्षेत्र में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। कई गांवों में तालाबों का जलस्तर कम हो चुका है,जबकि बोरवेल भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इससे सिंचाई के साथ-साथ भविष्य में पेयजल संकट की आशंका भी बढ़ने लगी है।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर इस क्षेत्र में जल उपलब्धता सीधे किसानों की आय,पशुधन और ग्रामीण जीवन से जुड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार,समय पर सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करना कृषि उत्पादन और ग्रामीण आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।


जल संकट का प्रभाव केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता। यदि नहरों में जल प्रवाह शुरू नहीं होता,तो रबी फसल को नुकसान होने से किसानों की आय प्रभावित हो सकती है,जिससे स्थानीय बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

जानकारों का मानना है कि नहरों में नियमित जल प्रवाह से सतही और भू-जल स्रोतों का पुनर्भरण होता है, जिससे दीर्घकालिक जल प्रबंधन को मजबूती मिलती है। वहीं समय पर हस्तक्षेप नहीं होने पर आगामी महीनों में पेयजल आपूर्ति और पशुधन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

कांग्रेस पदाधिकारियों ने प्रभावित, किसानों से 23 फरवरी को एसडीएम कार्यालय खरसिया पहुंचकर जल संकट से संबंधित मांगों को समर्थन देने की अपील की है। संगठन ने संकेत दिया है कि प्रशासन द्वारा संतोषजनक कार्यवाही नहीं होने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

वर्तमान स्थिति में यह मुद्दा क्षेत्र की कृषि सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण जनजीवन से जुड़ा प्रमुख विषय बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदम आने वाले समय में जल उपलब्धता,फसल उत्पादन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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