
चपले (बायंग चौक मंडी के पास)। ग्राम चपले में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक पंडित परमानंद वैष्णव (कनमुरा वाले व्यास) ने मानव जीवन में चरित्र, स्वास्थ्य और धन के महत्व पर विस्तृत प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि “धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया, लेकिन जिसका चरित्र चला गया उसका सब कुछ समाप्त हो जाता है।” कथा के माध्यम से उन्होंने नैतिक मूल्यों और आचरण की शुद्धता को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। आयोजन को स्थानीय स्तर पर “करने-कराने वाले हनुमान जी” की प्रेरणा से संपन्न बताया गया है।
खरसिया विधायक उमेश पटेल ने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में की सहभागिता,क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना किए।

खरसिया विधानसभा क्षेत्र के लोक प्रिय विधायक उमेश पटेल ने ग्राम चपले में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होकर पूजा-अर्चना की तथा क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस दौरान उन्होंने सवरे-सलोने भगवान श्रीकृष्ण के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक शीश नवाया।

“सांवली सूरत पर दिल दिवाना हो गया” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं।
12 फरवरी 2026 से 19 फरवरी 2026 तक आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में भगवान के जीवन प्रसंगों, भक्ति परंपरा और सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला जा रहा है। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 03 बजे से “राधे कृपा” तक निर्धारित है। आयोजन का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना और सदाचार आधारित जीवन मूल्यों का प्रसार करना बताया गया है।
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प्रवचन में कथावाचक पंडित परमानंद वैष्णव ने कहा कि आधुनिक समय में बढ़ती भौतिकता और प्रतिस्पर्धा के बीच चरित्र और स्वास्थ्य की उपेक्षा सामाजिक असंतुलन का कारण बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्ति की स्थायी सफलता, सामाजिक सम्मान और संतुलित जीवन का आधार सुदृढ़ चरित्र तथा स्वस्थ जीवनशैली है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संयमित जीवन, नैतिक आचरण और आध्यात्मिक साधना अपनाने का संदेश दिया गया।
कथा में सुदामा चरित्र को नि:स्वार्थ प्रेम, आत्मीय संबंध और सच्ची श्रद्धा का उदाहरण बताया गया। प्रवचन में यह संदेश दिया गया कि ईश्वर के समक्ष बाहरी वैभव नहीं, बल्कि शुद्ध भाव और समर्पण का महत्व होता है।
धार्मिक दृष्टि से यह प्रसंग सामाजिक समरसता, विनम्रता और मानवीय मूल्यों को भी रेखांकित करता है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को लोभ, अहंकार और भौतिक आकर्षण से दूर रहकर भक्ति मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी गई।

कथा स्थल पर भजन, कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से धार्मिक वातावरण बना हुआ है। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को बल मिल रहा है तथा सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ने की बात सामने आ रही है।



