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खरसिया मदनपुर में सप्त दिवसीय रामकथा महोत्सव : सीताराम विवाह प्रसंग में जयघोष के साथ भक्त झूमे

प्रवीण चतुर्वेदी @खरसिया।खरसिया मदनपुर में चल रहे सप्त‌ दिवसीय श्रीरामकथा महोत्सव के पंचम दिवस पर श्री सीताराम विवाह प्रसंग बड़े ही धूमधाम और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। मुख्य यजमान श्री मति मिन देवी ,श्री कामता प्रसाद शर्मा के यहाँ श्री अवधधाम से पधारी कथा वाचिका रसिक साध्वी उमा जी अपने मधुर कंठ से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दिव्य जीवन प्रसंगों का श्रवण करा रहीं हैं।
कथा के दौरान साध्वी उमा जी ने बताया कि जब श्रीराम गुरु विश्वामित्र के साथ यज्ञरक्षा के लिए गए, तब उनकी आयु लगभग 16 वर्ष थी। लक्ष्मणजी भी उनके साथ थे। गुरु आज्ञा से श्रीराम ने ताड़का और सुबाहु का वध किया तथा मारीच को समुद्र की ओर भगा दिया। इसके बाद मिथिला पहुंचने पर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का श्रीराम के चरण स्पर्श से उद्धार हुआ।


जनकपुर में आयोजित शिवधनुष यज्ञ में अनेक राजाओं के बीच श्रीराम ने गुरु आज्ञा से शिवधनुष को उठा कर तोड़ दिया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि जनकनंदिनी सीता के लिए उपयुक्त वर केवल श्रीराम ही हैं। नगर में विवाह की मंगल तैयारियां शुरू हुईं और धर्म–सद्भाव के इस पावन मिलन में अयोध्या के चारों राजकुमारों का विवाह मिथिला की चारों राजकुमारियों के साथ तय हुआ—श्रीराम का माता सीता से, भरत का मांडवी से, लक्ष्मण का उर्मिला से तथा शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति से। चारों मंडपों में वैदिक मंत्रों की गूंज, देवताओं की पुष्पवर्षा और भक्तों के जयघोष के बीच भव्य विवाह संपन्न हुआ।


भक्तजन भक्ति-भाव से झूमते हुए कथा रस में सराबोर नजर आए। आचार्य पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि कथा वाचिका रसिक साध्वी उमा जी मात्र 16 वर्ष की आयु से पूरे भारतवर्ष में कथा वाचन कर रही हैं और यह उनकी 150वीं कथा है।
श्रीराम कथा महायज्ञ में मदनपुर खरसिया के साथ ही आसपास के अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्ममय वातावरण में शामिल हो रहे हैं।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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