सीफूड इंडस्ट्री पर अमेरिकी टैरिफ का असर
सरकार भारत समुद्री उत्पादों के निर्यात पर लगातार नज़र रखती है और इस क्षेत्र के प्रदर्शन को समर्थन देने व बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। वाणिज्य विभाग के अंतर्गत महानिदेशालय वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी (डीजीसीआईएस) के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (अप्रैल–अक्टूबर 2025) के पहले सात महीनों में भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस अवधि में निर्यात मूल्य ₹42,322 करोड़ (4.87 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज ₹35,107.6 करोड़ (4.20 अरब अमेरिकी डॉलर) की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। वहीं, निर्यात मात्रा भी 12 प्रतिशत बढ़कर 9.62 लाख मीट्रिक टन से 10.73 लाख मीट्रिक टन हो गई है।
सरकार सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क (टैरिफ) उपायों के बदलते प्रभाव का आकलन किया जा सके। साथ ही, भारतीय निर्यात पर इनके असर को कम करने के लिए सरकार एक व्यापक और बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रही है। इस रणनीति के तहत भारत-अमेरिका के बीच आपसी लाभ वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी सरकार के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। इसके अलावा, रिज़र्व बैंक की व्यापार-संबंधी व्यवस्थाओं और निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के माध्यम से त्वरित राहत दी जा रही है। घरेलू मांग बढ़ाने के लिए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार किए जा रहे हैं। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई निर्यात संवर्धन मिशन जैसी पहलें शुरू की गई हैं, जिनके तहत निर्यातकों को लक्षित सहायता दी जाती है। सरकार नए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) करने के साथ-साथ मौजूदा एफटीए के बेहतर उपयोग पर भी काम कर रही है। इन लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप, हाल के महीनों में यूरोपीय संघ और रूस को निर्यात के लिए स्वीकृत मत्स्य (मछली) प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या में वृद्धि हुई है।
भारत सरकार का मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (MoFAH&D) मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने पिछले पाँच वर्षों में देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास के लिए कुल ₹21,274.13 करोड़ की परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान ₹9,189.74 करोड़ है। भारत सरकार की सुविचारित नीतियों और पहलों के परिणामस्वरूप, भारत का समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात 2013–14 में ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹62,408 करोड़ से अधिक हो गया है, यानी इसमें दो गुना से भी अधिक वृद्धि हुई है।
भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने वाणिज्य विभाग के अंतर्गत समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) तथा अन्य संबंधित पक्षों के सहयोग से भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसके अंतर्गत हितधारकों से परामर्श, सीफूड निर्यातक बैठकें तथा मूल्य संवर्धन पर चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने संभावित भागीदार देशों के दूतावासों और उच्चायोगों के साथ भी कई बैठकें की हैं, ताकि सहयोग की संभावनाओं की तलाश की जा सके। इन बैठकों का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार सहयोग को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना, जैव-सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को सुदृढ़ करना, स्वचालन (ऑटोमेशन) को आगे बढ़ाना तथा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) साझेदारियों को प्रोत्साहित करना रहा है। इसके साथ ही व्यापक सतत विकास पहलों को भी समर्थन दिया जा रहा है। सरकार उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, गिफ्ट तिलापिया, ग्रूपर, पी. मोनोडोन, स्कैम्पी और समुद्री शैवाल को शामिल करते हुए विविधीकृत जलीय कृषि को भी बढ़ावा दे रही है। इसमें नए बाज़ारों की पहचान और मौजूदा बाज़ारों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन प्रयासों के तहत व्यापार सुगमता को सशक्त करना, व्यापार प्रतिनिधिमंडलों और तकनीकी अध्ययन यात्राओं के माध्यम से निर्यात संवर्धन को बढ़ावा देना तथा खरीदार–विक्रेता बैठकें आयोजित करना शामिल है।
उपरोक्त उत्तर भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ़ लल्लन सिंह द्वारा राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दिया गया था।




