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नगर की सड़कों पर यातायात संकट: प्रशासनिक उदासीनता और व्यापार पर असर…

खरसिया। नगर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है और इसके पीछे अव्यवस्थित अतिक्रमण के साथ-साथ प्रशासनिक उदासीनता भी साफ़ झलक रही है। मेडिकल स्टोर,बैंकों से लेकर बर्तन,किराना,हार्डवेयर,कपड़ा और होटल व्यवसायों तक—अधिकांश प्रतिष्ठानों द्वारा सड़क किनारे वाहन खड़े करना और सामान फैलाना अब सामान्य दृश्य बन चुका है। परिणामस्वरूप मुख्य मार्ग संकरे हो गए हैं और रोज़मर्रा जाम की स्थिति बन रही है।

यह स्थिति केवल आमजन की परेशानी तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसका सीधा असर व्यापार-व्यवसाय पर भी दिखने लगा है। जाम और अव्यवस्था के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे स्थानीय कारोबार को नुकसान उठाना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि एक व्यवसायी द्वारा किए गए अतिक्रमण को देखकर अन्य व्यापारी भी उसी राह पर चल पड़ते हैं, जिससे समस्या और गहरी हो जाती है।

पैदल यात्रियों, बुज़ुर्गों और स्कूली बच्चों के लिए यह हालात जोखिमपूर्ण बन चुके हैं। इसके बावजूद,स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार विभागों की ओर से न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही प्रभावी दंडात्मक कार्यवाही। इससे यह संदेश जा रहा है कि यातायात नियम और नगर व्यवस्था केवल कागज़ों तक सीमित हैं।

औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाले खरसिया में यातायात अनुशासन नागरिक सुरक्षा के साथ-साथ नगर प्रशासन की विश्वसनीयता से भी जुड़ा विषय है। यदि समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ सख़्त और समान कार्यवाही नहीं की गई,तो यह अव्यवस्था स्थायी समस्या का रूप ले सकती है।

नगर के व्यापारियों के लिए भी यह आत्ममंथन का विषय है। सुव्यवस्थित यातायात और अतिक्रमण-मुक्त सड़कें न केवल नगर की छवि सुधारेंगी,बल्कि लंबे समय में उनके व्यवसाय के लिए भी अधिक लाभकारी सिद्ध होंगी। अब सवाल स्पष्ट है—नियम प्रभावी ढंग से लागू होंगे या सड़कों पर अतिक्रमण का ही राज चलता रहेगा।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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