खरसिया: मीडिया को मिली जानकारी अनुसार क्षेत्र में हो रही लगातार भारी बारिश ने खरसिया के धान संग्रहण केन्द्र की हालत बदतर कर दी है। हजारों क्विंटल धान बारिश में भीगकर सड़ने लगा है,जिससे एक ओर सरकारी अनाज की भारी बर्बादी हो रही है, वहीं दूसरी ओर राइस मिलर्स दोहरी मार झेल रहे हैं। मिलर्स की मानें तो यदि वे समय पर धान की मिलिंग नहीं करते,तो उन पर पेनाल्टी लगाई जाती है और यदि करते हैं तो भीगे व सड़े धान की मिलिंग से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
कीचड़ में फंसे ट्रक…
सूत्रों के अनुसार,अधिकांश संग्रहण केन्द्रों में धान खुले में पड़ा हुआ है। वहां उचित शेड की व्यवस्था नहीं होने से लगातार हो रही बारिश से धान पूरी तरह भीग चुका है। जमीन पर फैली कीचड़ और जलजमाव के कारण ट्रकों की आवाजाही भी ठप है। कई ट्रक कीचड़ में फंसे हुए हैं, जिससे धान की ढुलाई और वितरण दोनों ही प्रभावित हो गए हैं।
मिलर्स की दुविधा: ना करें तो पेनाल्टी,करें तो नुकसान
स्थानीय राइस मिलर्स संघ ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे धान उठाकर मिलिंग करना चाहते हैं, लेकिन सरकारी नियम और प्रक्रियाएं आड़े आ रही हैं। एक मिलर ने दबी-जुबान बताया कि,
“अगर हम धान उठाते हैं और चावल में नमी पाई जाती है,तो हम पर पेनाल्टी लगा दी जाती है। मगर अगर हम इंतज़ार करते हैं, तो धान सड़ता चला जाता है, जिससे और भी ज्यादा नुकसान होता है।”
प्रशासन का रवैया: इंतज़ार या लापरवाही?
ज़मीनी हकीकत यह है कि न तो किसी प्रकार की राहत पहुंचाई गई है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है जिससे धान की बर्बादी को रोका जा सके।
शासन से मांगी गई राहत
राइस मिलर्स संघ ने शासन से मांग की है कि—
बारिश की आपदा को देखते हुए संग्रहण केन्द्रों की तत्काल जांच कराई जाए,
मिलर्स को बिना पेनाल्टी के धान उठाकर मिलिंग करने की अनुमति दी जाए,
धान की उचित सुरक्षा के लिए तात्कालिक प्रबंध किए जाएं।
खरसिया में धान की बर्बादी अब सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता का प्रतीक बनती जा रही है। यदि समय रहते सरकार ने स्थिति को नहीं संभाला,तो इसका असर पूरे खाद्यान्न आपूर्ति तंत्र पर पड़ सकता है।
संग्रहण केन्द्र प्रभारी से सम्पर्क करना चाहें शासन-प्रशासन का पक्ष रखा जा सके परन्तु उनका मोबाइल व्यस्त रहा इस कारण पक्ष रखा जा नहीं सका ।


