कोई पैर क्यों छूता है और बदले में आपको क्या-क्या करना चाहिए? जानिए शास्त्रों की दृष्टि से…
हमारे भारतीय संस्कृति में किसी बड़े या सम्मानजनक व्यक्ति का पैर छूना एक आम परम्परा है लेकिन इस परम्परा के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाव होता है। कोई पैर क्यों छूता है और ऐसे में आपको शास्त्रीय रूप से क्या करना चाहिए, चलिए समझते हैं…
हमारे देश प्रदेश में पैर छूने की परंपरा सम्मान, नम्रता और ऊर्जा के आदान-प्रदान का प्रतीक माना जाता है।‘इंद्रियों को वश में रखना’, यही चरण स्पर्श की गहरी बात है।‘इंद्रियों को वश में रखना’, यही चरण स्पर्श की गहरी बात है।मनुस्मृति के अनुसार गुरु, ब्राह्मण, वृद्ध, आचार्य और माता-पिता के चरण स्पर्श से पुण्य प्राप्त होता है।
जब कोई आपके चरण छुए,तो आशीर्वाद देते समय सकारात्मक ऊर्जा और भगवान का नाम लेना लाभकारी होता है।
हमारे देश प्रदेश में जब हम किसी को पैर लगाते हैं, तो हमें दोष ना लगे इस डर से हम उसे प्रणाम कर उस दोष से छुटकारा पाने का प्रयास करते हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरह हम स्वेच्छा से भी लोगों के पैर में झुककर उनका चरण स्पर्श करते हैं, लेकिन यह सामान्य रूप से सम्मान, नम्रता और ऊर्जा के आदान-प्रदान का प्रतीक माना जाता है। इसमें दोष नहीं लगता लेकिन क्यों? प्रश्न यह भी है कि यह परम्परा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है कि इसका सदियों से पालन होता आया है। साथ में यह भी जानना उतना ही महत्वपूर्ण है कि जब कोई आपके पैर छूता है,तो आपको क्या करना चाहिए। इन दोनों के उद्देश्य और महत्व को समझना बेहद जरूरी है।
पैर छूने की परंपरा क्यों है?
हमारे देश प्रदेश में बड़े लोगों के चरण स्पर्श करने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। इसके पीछे मुख्य रूप से 3 कारण हैं। पहला कारण यह है कि शिष्य या छोटा व्यक्ति अपने अहंकार को त्याग कर किसी बड़े व्यक्ति के ज्ञान, अनुभव और अस्तित्व के आगे झुककर उसे प्रणाम करता है। दूसरा कारण यह है कि शास्त्रों के अनुसार,बड़े-बुज़ुर्गों के शरीर में तप,सेवा और ज्ञान की ऊर्जा होती है, जो चरण स्पर्श करने वाले को आशीर्वाद के रूप में मिलती है। तीसरा यह कि पैर छूना एक संस्कारात्मक क्रिया है जो व्यक्ति को अपने कर्तव्यों की याद दिलाती है कि विनम्र बनो, अहंकार छोड़ो और ज्ञान लो। ‘इंद्रियों को वश में रखना’,यही चरण स्पर्श की गहरी बात है। जब हम किसी ज्ञानी या तपस्वी के चरण छूते हैं, तो हम अपने ‘अहं’ को गिराते हैं और विवेक को जगाते हैं।
मनुस्मृति में कहा गया है कि ‘गुरु-पत्नी, ब्राह्मण,वृद्ध,आचार्य और माता-पिता के चरण स्पर्श करने से पुण्य प्राप्त होता है। चरण स्पर्श से कभी-कभी वो हासिल हो जाता है,जिसकी आप कल्पना नहीं करते। जैसे कि,महाभारत में युधिष्ठिर,भीष्म पितामह के चरण छूते हैं, तो उन्हें भीष्म पितामह आदतन विजयी होने का आशीर्वाद दे देते हैं। भीष्म पितामह जैसे हस्ती का आशीर्वाद ना तो खाली जा सकता था और ना ही यह आशीर्वाद वापस लिया जा सका था। चरण स्पर्श के बारे में शास्त्रों में यह भी कहा गया कि तप,त्याग और ज्ञान से युक्त मनुष्य के चरण छूने मात्र से पापों का क्षय होता है।
जब कोई आपके चरण छुए तो क्या करना चाहिए?
आम तौर पर कोई जब किसी के चरण छूता है, तो वह व्यक्ति उसे आशीर्वाद देता है। लेकिन आशीर्वाद देते वक्त अगर वह व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा रखे,तो यह ऊर्जा भी चरण छूने वाले को हासिल होता है। साथ ही अगर आशीर्वाद देते वक्त कोई व्यक्ति भगवान का नाम ले,तो उस नाम लेने का लाभ भी चरण छूने वाले को प्राप्त होता है। इसलिए, जब आप किसी को आशीर्वाद दें,तो स्वयं की ऊर्जा देने के साथ-साथ ईश्वर का नाम लें,ताकि उसका लाभ आपके साथ-साथ आशीर्वाद ग्रहण करने वाले को भी मिले। ध्यान रखें किसी का चरण छुए जाने से स्वयं को श्रेष्ठ समझने की भूल न करें। यह आदर का भार है,गर्व का नहीं। जब कोई आपके चरण स्पर्श करता है, तो आपका उत्तर केवल शब्दों में नहीं,बल्कि मन की भावना में भी होना चाहिए। कई बार आपके बराबर का व्यक्ति आपके चरण स्पर्श कर लेता है। ऐसे में,यदि आप स्वयं को आशीर्वाद देने के लिए योग्य नहीं मानते, तो भी हाथ जोड़कर विनम्रता से मुस्कराइए और स्वीकार कर लीजिए। लेकिन जब कोई सम्मानपूर्वक पैर छुए,तो आशीर्वाद के साथ अपने कर्मों में स्थिर रहें ताकि आप उस आदर के योग्य बने रहें।




