Uncategorised

खरसिया के गांवों में जल संकट चरम पर: प्यास बुझाने को तरस रहे ग्रामीण,कब जागेगा प्रशासन?

खरसिया। एक ओर आसमान से आग बरस रही है, तो दूसरी ओर धरती का सीना खाली होता जा रहा है। खरसिया क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में जल संकट अब विनाशकारी मोड़ पर पहुंच चुका है। हैंडपंप सूख चुके हैं,कुएं दम तोड़ चुके हैं और ट्यूबवेल ने भी जवाब दे दिया है। जीवन दायिनी माण्ड नदी की धारा सूखने के बाद हालात बद से बदतर हो गए हैं—गांव के गांव पानी के लिए छटपटा रहे हैं।

महिलाएं-बच्चे पानी के लिए हो रहे हलाकान
गांव की गलियों में अब बच्चों की किलकारी नहीं,सिर्फ खाली बर्तन की आवाजें गूंज रही हैं। महिलाएं दूर सिर पर मटके ढो रही हैं, बच्चे स्कूल छोड़ पानी की खोज में भटक रहे हैं। यह दृश्य 21वीं सदी के भारत का है—जहां “हर घर जल” की बातें केवल नारों तक सीमित हैं।

उद्योगों की लापरवाही,प्रशासन की खामोशी
क्षेत्र में फैले उद्योगों द्वारा बेतहाशा भूजल दोहन ने हालात को इस कदर बिगाड़ दिया है कि अब ज़मीन से पानी नहीं,केवल हताशा निकल रही है और प्रशासन? बस फाइलों में प्रस्ताव,बैठकों में चर्चा और जमीनी हकीकत में—शून्य।

ग्रामीणों की गुहार: अब तो जागो सरकार
ग्रामीणजनों की आंखों में आंसू हैं और सवाल भी—”क्या हम इंसान नहीं? क्या हमें पीने का पानी मांगने का भी हक नहीं?” रोज़ दूर चलकर पानी लाने वाले बुजुर्गों की बेबसी सरकार के “विकास” के दावों को मुंह चिढ़ा रही है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: संकट नहीं, आपदा है ये
पर्यावरण विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं—अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो यह जल संकट जन-स्वास्थ्य,महामारी और बड़े पैमाने पर पलायन जैसी समस्याओं को जन्म देगा। यह सिर्फ संकट नहीं,एक आगामी आपदा की दस्तक है।

प्रशासन से सवाल—कब तक रहेंगे खामोश?
अब समय है जब प्रशासन को दिखावे की नहीं, ज़मीनी कार्यवाही की ज़रूरत है। टैंकर भेजने से नहीं,स्थायी समाधान से ही ग्रामीणों को राहत मिल सकती है। वरना आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है।

जल संकट अब एक चेतावनी नहीं—एक चुभती हुई सच्चाई है। और अगर आज नहीं चेते,तो कल बहुत देर हो जाएगी

Show More

Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!