चाल, चरित्र और चेहरा का महासंग्राम खरसिया में!

खरसिया। नगर सरकार के चुनावी मौसम में शहर के मतदाता असमंजस में हैं। हर गली-मोहल्ले में एक ही चर्चा—”इस बार चाल,चरित्र और चेहरा देखकर वोट देना है!” लेकिन समस्या यह है कि ये तीनों गुण एक ही नेता में मिलें तो मिलें कैसे?
चाल:
कुछ प्रत्याशी अपने वादों की ऐसी चाल चलते हैं कि जनता के कानों में मिश्री घोल देते हैं। चुनाव के पहले गलियों में घूम-घूमकर बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हैं और ओवर ब्रिज, अंडर ब्रिज को लेकर आंसू बहाते हैं। मगर चुनाव जीतते ही इतनी तेज़ी से गायब हो जाते हैं कि खोजने पर भी नहीं मिलते।
चरित्र:
चरित्र की परीक्षा तो मतदाता कई चुनावों से दे ही रहे हैं। अखबारों में सुर्खियां बटोरने वाले कुछ नेता चुनाव आते ही जनता के इतने हमदर्द बन जाते हैं कि लगता है, खरसिया नगर की जनता इनके बिना कैसे जिंदा थी! लेकिन चुनाव के बाद वही जनता इन्हें याद करती रह जाती है और ये अपने “महत्वपूर्ण दौरों” में व्यस्त हो जाते हैं।
चेहरा:
चेहरे की बात करें तो इस बार चुनाव में कई नए चेहरे हैं,जो जनता को भरोसा दिला रहे हैं कि “हम अलग हैं।” लेकिन पुराने चेहरे भी मैदान में हैं, जिनका कहना है कि “हमारे चेहरे से तो आप पहले ही वाकिफ हैं,अब बदलने से क्या फायदा?”
मतदाता अब इस उधेड़बुन में हैं कि चाल देखें,चरित्र परखें,या चेहरे पर भरोसा करें? कुछ अनुभवी नागरिकों का कहना है, “भाई, इन तीनों को देखने के चक्कर में वोटिंग दिन बीत जाएगा,इसलिए बस वही चुनो जो कम से कम नुक़सान नगर का करे!”
खरसिया नगर की जनता अब पूरी तरह से तैयार है,बस सवाल यही है—क्या इस बार वाकई “चाल, चरित्र और चेहरे” की कसौटी पर फैसला होगा,या फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी?
आप सभी नगर पालिका परिषद क्षेत्र के जागरूक मतदाताओं से हमारी टीम का आग्रह 11फरवरी को होने वाले नगरपालिका परिषद चुनाव में अपने मतदान केन्द्र पहुंच कर मतदान अवश्य करें खरसिया नगर के बेहतरी के लिए …




