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नौतपा,इस दौरान करें ये चीजें और इन कार्यों से बनाएं दूरी…

नौतपा के दौरान हिंदू धर्म में कुछ उपाय बताए गए हैं. कहते हैं कि इस दौरान पेड़ पौधे लगाने का प्रावधान होता है. साथ ही कुछ खास चीजों को करने का खास महत्व होता है. इस लेख में हम आपको बताएंगे कि नौतपा का समय क्या रहेगा और आप इस दौरान क्या कर सकते हैं और क्या नहीं.

नौतपा का सही समय


शास्त्रों के मुताबिक साल 2022 के रोहिणी नक्षत्र 25 मई से 8 जून तक रहेगा और नौतपा 2 जून तक जारी रहेगा. सूर्य देव 25 मई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. वे 8 जून को सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र से बाहर हो जाएंगे.

इस दौरान क्या करें
1. सूर्य की गर्मी से तापमान बढ़ा हुआ रहेगा और ये शरीर के तापमान को भी प्रभावित कर सकता है. इस दौरान हल्का खाना खाएं और ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं.

2. खुद को हाइड्रेट रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. साथ ही आप लोगों के लिए पानी का दान कर सकते हैं. इस दौरान जगह-जगह पानी के मटके रखवा दें. पितरों को प्रसन्न करने के लिए घर में पानी के भरे हुए दो मटके रखें. ध्यान रहे की पानी के दान से पहले आपको ये कार्य करना है.

3. नौतपा के बीच लोगों को जल के अलावा अन्न, जूते-चप्पल, छाता, वस्त्र, पानी से भरा हुआ घड़ा, सत्तू, पंखा, आम, खरबूजा, दही, गंगाजल आदि ठंडी चीजें और गर्मी से बचाव करने वाली चीजों को दान करना चाहिए.

4. इंसान ही नहीं आपको पक्षु-पक्षियों का भी खयाल रखना चाहिए. नौतपा के दौरान जानवरों एवं पक्षियों के लिए जगह-जगह पीने के पानी की व्यवस्था करें.

5. नौतपा के दौरान पेड़-पौधे लगाना बहुत अच्छा माना जाता है. पेड़ एवं पौधों से मिलने होने वाली छाव लोगों को गर्मी में राहत दे सकती है. ऐसा करने से आप पुण्य कमा सकते हैं.

क्या न करें
1. नौतपा के दौरान आंधी-तूफान के आने का माहौल बना रहता है, ऐसे में इस दौरान शादी या मुंडन के लिए कार्यक्रम का आयोजन करने से बचें.
2. नौतपा के दौरान तापमान सामान्य से ज्यादा होता है और इस दौरान बाहर निकलने से परहेज करें. किसी भी तरह की यात्रा करने से आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि, मजबूरी होने पर ही बाहर निकलें.

3. नौतपा के दौरान ही नहीं सामान्य तौर पर भी आपको तला-भुना खाने से परहेज करना चाहिए. गर्मी में ऐसा खाना तबीयत को बिगाड़ सकता है.

यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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