
सुदामा चरित्र जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की हमें सीख देता है…
श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस को बाल व्यास विष्णु प्रिया अवि जी ने सुदामा चरित्र सुखदेव की विदाई का वर्णन किया उन्होंने कहा की मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए मित्रता एक दूसरे का पूरक होता है।

रायगढ़ जिला,खरसिया विकास खण्ड के अयोध्या धाम जैसे धन्य धरा ग्राम चपले राबर्टसन स्थित बायंग चौक नंदेली रोड़ के समीप मंडी परिसर में बह रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन मंगलवार को कथा वाचक बाल व्यास विष्णु प्रिया अवि जी ने सुदामा चरित्र का प्रसंग का रसपान कराई। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि संसार में मित्रता श्री कृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए।

सुदामा के आने की खबर मिलने पर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे थक गए थे पानी पर रात को हाथ छुए नहीं में के जल से पग धोए अर्थात श्री कृष्णा अपने बाल सखा सुदामा के आने पर उनके पैर धोने के लिए पानी मंगवाया परंतु सुदामा की दुर्दशा को देखकर इतना दुख हुआ कि प्रभु के आंसुओं से ही सुदामा के पैर धूल गए।
आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर वह भूल जाते हैं जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनना चाहिए,भगवान से बनाया गया रिश्ता जीव को मोक्ष की ओर ले जाता है उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने शाखा कृष्ण का चिंतन और स्मरण नहीं छोड़ा इसके फल स्वरुप कृष्ण ने भी सुदामा को परम पद प्रदान किया।
बाल व्यास ने सुदामा के चरित्र की सप्रसंग व्याख्या की…

सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनकर मुख्य यजमान श्रीमती षष्ठीगेंदलाल श्रीवास, ग्रामवासी,क्षेत्रवासी श्रद्धालु भाव विभोर हो गए बाल व्यास विष्णु प्रिया अवि जी ने बताया कि भागवत कथा सुनने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है कथा सुनने आस-पास के गांव से भी तेज धूप के उपरांत ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक उमेश पटेल ने बताया कि बाल व्यास विष्णु प्रिया अवि जी के श्री मुख से श्रीमद्भागवत कथा सुनने यहां दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं, अमृतमयी श्रीमद्भागवत कथा रसपान कर उसे अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले…
मानव जीवन के मुक्ति का एकमात्र साधन है श्रीमद् भागवत कथा। इसके श्रवण, मनन और जीवन में अनुशरण से ही मुक्ति मिलेगी। जब हम छोटे बच्चे के रूप में थे तो हम अज्ञान में भटक रहे थे और फिर गुरु जनों की कृपा से ज्ञान का प्रकाश मिला। इसी प्रकार श्रीमद्भागवत कथा में भक्त और भगवान का पावन चरित्र का चिंतन, श्रवण करते-करते हमारा चित भगवान में लग जाता है और जब हमारा शरीर छूटता है तो प्राण श्री भगवान में समाहित हो जाता है और हमें संसार के आवागमन से मुक्ति मिल जाती है।

चपले रॉबर्टसन गांव में श्रीमद्भागवत कथा आयोजक श्रीवास परिवार को श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन के लिए बधाई देते हुए क्षेत्र का माहौल भक्तिमय करने के लिए धन्यवाद दिए।
चपले रॉबर्टसन गांव में आयोजक परिवार को श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन के लिए बधाई देते हुए क्षेत्र का माहौल भक्तिमय करने के लिए धन्यवाद कहें और श्रीमद्भागवत कथा विश्राम के ओर हो चला…




