देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती आज, पीएम मोदी-राहुल ने दी श्रद्धांजलि

भारत आज अपने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को याद कर रहा है। जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। इस साल उनकी 131वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने उन्हें याद किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।’
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
— Narendra Modi (@narendramodi) November 14, 2020
वहीं, राहुल गांधी ने ट्वीट कर देश के पहले पीएम को याद करते हुए कहा, ‘आज, भारत अपने पहले पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती मना रहा है। एक विशाल दूरदर्शी जिन्होंने हमारे देश की नींव भाईचारे, समतावाद और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ रखी। हमारा प्रयास इन मूल्यों के संरक्षण के लिए होना चाहिए।’
Today, India celebrates the birth anniversary of its first PM Pandit Jawaharlal Nehru ji: a towering visionary who laid the foundation of our country with values of brotherhood, egalitarianism & modern outlook.
Our endeavour must be to conserve these values.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) November 14, 2020
जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से खासा लगाव था और बच्चे उन्हें ‘चाचा नेहरू’ कहकर पुकारते थे। पहले भारत में भी 20 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता था। लेकिन 27 मई, 1964 को जब जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ तब ये निर्णय लिया गया कि अब नेहरू के जन्मदिवस पर बाल दिवस मनाया जाएगा। और इस बात को पूरे देश ने स्वीकारा भी।
जलियांवाला बाग हत्याकांड ने नेहरू को झकझोर दिया
जवाहरलाल नेहरू को लेकर यह कहा जाता है कि उनका राजनीतिक जागरण तब हुआ जब उन्हें 1917 में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी के बारे में पता चला। वह तब ऑल इंडिया होम रूल लीग में शामिल हो गए। साल 1919 में, जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद नेहरू ने ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनाल्ड डायर के बारे में ट्रेन में सुना। इसने उन्हें और अधिक दृढ़ बना दिया और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने की कसम खाई।
भारत रत्न से 1955 में सम्मानित किया गया
जवाहरलाल नेहरू को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों में गिना जाता है। उनका लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद में अटूट विश्वास था। वर्ष 1955 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से पंडित नेहरू को सम्मानित किया गया। उन्होंने देश के नेतृत्व की बागडोर उस समय संभाली, जब देश में भुखमरी, गरीबी और अशिक्षा की स्थिति अपने चरम पर थी।




