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नीदरलैंड्स की कंपनी से 750 करोड़ की धोखाधड़ी में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रेडिट सुविधाओं का बेजा इस्तेमाल कर नीदरलैंड्स की कंपनी से 750 करोड़ रुपये की बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने शनिवार को बताया कि साई चंद्रशेखर नामक व्यक्ति को धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे सात दिन की ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

ईडी ने एक बयान में कहा कि वीरकरण अवस्थी, विनोद सिरोही और केपीएमजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ शुरू की गई जांच के संबंध में चंद्रशेखर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था। हसद नीदरलैंड्स बीवी की ओर से मिली शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर के अध्ययन के बाद इनके खिलाफ पीएमएलए का मामला दर्ज किया गया था।
हसद नीदरलैंड्स बीवी हसद फूड कंपनी की सहयोगी कंपनी है। हसद नीदरलैंड्स बीवी वीरकरन अवस्थी और रितिका अवस्थी ने शुरू की थी। ये दोनों बुश फूड्स ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भी थे।
ईडी का आरोप है कि इन लोगों ने शेयरों या इनवेंटरी के स्तर को गलत ढंग से दिखाकर 120 मिलियन डॉलर (करीब 750 करोड़) की रकम जुटाई। इस तरह की गलत जानकारी के आधार पर आरोपियों ने बैंकों के संघ से 714 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधाएं हासिल कर ली। ये क्रेडिट सुविधाएं बुश फूड्स ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड ने उन शेयरों या इनवेंटरी के आधार ली जोकि वजूद में ही नहीं थे।

ईडी ने जांच में पाया कि वीरकरन ने अन्य निदेशकों के साथ मिलकर फर्जी शेयर बनाई और कंपनी के फर्जी वित्तीय विवरण तैयार किए। इन लोगों ने बिक्री और खरीद के एकमुश्त लेनदेन के दस्तावेज तैयार किए ताकि बुश फूड्स के रिकॉर्ड में बढ़े टर्नओवर, लाभांश और अतिरिक्त शेयर को दिखाया जा सके।

चंद्रशेखर हसद फूड्स कंपनी का कर्मचारी था और लेनदेन का आकलन वाली टीम का हिस्सा था। ईडी का आरोप है कि चंद्रशेखर ने वीरकरन अवस्थी के साथ मिलकर हसद नीदरलैंड्स को धोखा देने के लिए साजिश रची।

चंद्रशेखर की बुश फूड्स ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड और हसद नीदरलैंड्स बीवी के बीच बिजनेस लेनदेन में अहम भूमिका थी। उसकी अहम भूमिका के लिए वीरकरन अवस्थी ने उसे 20.79 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया था।

चंद्रशेखर ने मिली रकम से बंगलूरू के इंदिरानगर में 5.8 करोड़ रुपये से एक संपत्ति खरीदी। उसे वीरकरन की मां और पिता के अकाउंट से एक करोड़ रुपये भी मिले। इस रकम को उसने अपने पिता के इलाज में खर्च किया।

इसके अलावा उसे 13.79 करोड़ रुपये वीरकरन की दुबई स्थित कंपनी हरीन वेंचर्स लिमिटेड से मिले। ईडी ने बताया कि उसने चंद्रशेखर की बंगलूरू और मुंबई स्थिति संपत्तियों और बैंक खातों में जर्मा 7 करोड़ रुपये अटैच किए हैं।

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