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बायो इथेनाल उत्पादक राज्य के रूप में बनेगी छत्तीसगढ़ की पहचान : कृषकों की आर्थिक स्थिति होगी सुदृढ़ और बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य और उद्योग विभाग द्वारा राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नवीन औद्योगिक नीति एक नवम्बर 2019 से 2024 लागू की गई है। प्रदेश में कृषि उत्पादकों को समूचित मूल्य स्थानीय स्तर पर ही मिल सके इस उद्देश्य से धान और गन्ने पर आधारित जैव ईंधन बायो इथेनाल के उत्पादन को विशेष रूप से उच्च प्राथमिकता श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे राज्य में उपलब्ध अतिरिक्त धान, गन्ने से बायो इथेनाल के निर्माण से छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान अब बायो इथेनाल उत्पादक राज्य के रूप में स्थापित होगी तथा कृषकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्यमों में आवश्यक कुशल श्रेणी में 70 प्रतिशत अकुशल श्रेणी में 100 प्रतिशत एवं प्रबंधकीय श्रेणी में 40 प्रतिशत रोजगार राज्य के स्थानीय निवासियों को मिलेगा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बायो इथेनाल लगाने के लिए एमओयू हस्ताक्षरित करने का समय 6 माह से बढ़ाकर 18 माह के अन्दर करने का निर्णय लिया गया है। राज्य शासन द्वारा नई औद्योगिक नीति ठमेचवाम चवसपबल के तहत बायो इथेनाल उत्पादन इकाइयों की स्थापना हेतु विशेष प्रोत्साहित पैकेज का अनुमोदन भी किया गया है। इसके तहत उत्पादन इकाईयों की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप (पीपीपी) मोड में स्थापना को विशेष प्रोत्साहन पैकेज में अनुमति दिए जाने का निर्णय लिया गया है। सहकारी शक्कर कारखाना कवर्धा, पण्डरिया, बालोद और अंबिकापुर में पी.पी.पी. मोड में इथेनॉल प्लांट स्थापित करने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई है।

 राज्य में उपार्जित किए जा रहे धान में से सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यता के उपरान्त शेष लगभग 6 लाख मैट्रिक टन धान का उपयोग इथेनाल के उत्पादन में किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस अतिशेष धान को नष्ट होने के स्थान पर समुचित सदुपयोग को दृष्टिगत रखते हुए अधिसूचना 30 सितम्बर 2019 के माध्यम से मार्कफेड से अनिवार्यतः क्रय की शर्त पर इथेनाल जैव ईंधन के उत्पादन हेतु बायो रिफाईनरी उद्योग की स्थापना को प्राथमिकता श्रेणी के उद्योगों में सम्मिलित किया गया है। राज्य शासन की इस मंशा के अनुरूप उद्योग विभाग द्वारा इस क्षेत्र में निवेश आमंत्रित करने के लिए निवेश की अभिरूचि (ई.ओ.आई.) जारी की गई है। कई इच्छुक निवेशकों द्वारा ई.ओ.आई पर अपना प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इन संयंत्रों की स्थापना के लिए कार्यवाही जारी है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रयासों के फलस्वरूप केन्द्र सरकार द्वारा एफसीआई के अतिशेष चावल से इथेनाल बनाने के लिए अनुमति दे दी है। अतिशेष चावल से इथेलान उत्पादन की दर 54 रूपए 87 पैसे प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल ने कृषकों के हित में लिए गए इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिए है इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है कि राज्य के किसानों से खरीदे गए अतिशेष धान का सीधे इथेनाल संयत्रों को जैव ईंधन उत्पादन के लिए अनुमति प्रदान की जाए। इससे राज्य में लगने वाले इथेनाल संयत्रों को किसानों द्वारा सीधे धान का विक्रय किया जा सकेगा। अतिशेष धान से सीधे इथेनाल उत्पादन की अनुमति राज्य के किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए अत्यन्त सहायक होगी।

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