
रायगढ़। पर्यावरण विभाग की एक भारी चूक सामने आई है, जिससे उद्योगों को फायदा होगा। फ्लाई एश की अवैध डंपिंग के कारण नुकसान उठाने वाले किसानों को मुआवजे का हकदार मानते हुए दो महीने में क्लेम सैटल करने को कहा गया था। मंगलवार को कलेक्टर ने आदेश जारी किया है जिसमें 30 अप्रैल को शिविर लगाकर ऐसे ग्रामीणों का आवेदन लेने को कहा गया है।
पावर प्लांटों से निकल रहे फ्लाई एश की वजह से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। वायु और जल प्रदूषण के साथ मृदा प्रदूषण भी इस वजह से हो रहा है। पावर प्लांटों ने किसी ठेकेदार से सेटिंग कर एश की अवैध डंपिंग ग्रामीण क्षेत्रों में कराई। इसके कारण कई खेतों की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। जमीनों की उपजाऊ क्षमता कम होती जा रही है। तमनार और घरघोड़ा में ऐसे किसान सैकड़ों की संख्या में हैं, जिनके फसलों को हानि हुई है। फ्लाई एश मैनेजमेंट में उद्योग फेल हो चुके हैं। पर्यावरण विभाग भी इस सच्चाई को छिपाने का प्रयास करता है। एनजीटी ने ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट पर 15 फरवरी को आदेश पारित किया था। इसमें दो प्रमुख सचिवों और सात उद्योगों पर पेनाल्टी करने के अलावा कई अन्य निर्देश भी दिए गए थे। इन्हीं में से एक बिंदु किसानों को मुआवजे का था। एनजीटी ने कहा था कि पावर प्लांटों से उत्सर्जित फ्लाई एश की वजह से कोई व्यक्ति प्रभावित हो रहा हो तो उसका क्लेम दो महीने के अंदर लिया जाए। इसके परिपालन में करीब ढाई महीने बाद कलेक्टर ने एक आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ज्वाइंट कमेटी को रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है इसलिए फ्लाई एश के निपटान या अवैध डंपिंग से प्रभावित ग्रामीणों का आवेदन 30 अप्रैल को लिया जाना है।
सरपंच और सचिवों को जिम्मेदारी
पर्यावरण विभाग ने इस मामले के निपटारे के लिए बहुत कम समय रखा है। आवेदन लेने के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की गई लेकिन समय चार दिन का ही दिया गया। सरपंच और सचिवों को आदेश दिया गया है कि वे ग्रामीणों से आवेदन लेकर पर्यावरण विभाग में जमा करें। ज्वाइंट कमेटी ने अपने निरीक्षण में पाया था कि नवापारा के घुरउराम राठिया को 7030 रुपए, कटंगडीह के हरचरण राठिया को 4.08 लाख, मालिकराम राठिया को 1.75 लाख और करमसिंह राठिया को 9342 रुपए का मुआवजा दिया गया है। इन किसानों के 6.483 हे. भूमि फ्लाई एश के कारण प्रभावित हुई है।

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