
खरसिया।जब सत्ता की गलियों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता एक साथ चलती है, तब एक जनप्रतिनिधि महज पद नहीं बल्कि समाज का मार्गदर्शक बनता है। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक उमेश पटेल ठीक इसी भूमिका को बखूबी निभा रहे हैं। उनकी सक्रियता,समर्पण और शिक्षकों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण आज एक उदाहरण बन चुका है।

तेज धूप,उमश,और बुंदाबांदी के मध्य कोहारडीपा प्राथमिक शाला में शिक्षक युक्तियुक्तकरण से उपजी स्थिति पर उनका संवेदनशील हस्तक्षेप यह साबित करता है कि वे केवल उत्सवों में भाषण देने वाले नेता नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के रीति नीति के साथ धरातल पर समाधान खोजने वाले जनसेवक हैं। जब विद्यालय में तालाबंदी की स्थिति उत्पन्न हुई, तब उन्होंने तुरंत प्रशासन, शिक्षक और ग्रामीणों को एक मंच पर लाकर त्रिपक्षीय समाधान सुनिश्चित किया। यह कार्य न केवल एक स्कूल का संकट हल करता है, बल्कि शिक्षा के प्रति एक जनप्रतिनिधि की प्रतिबद्धता भी दर्शाता है।

विधायक उमेश पटेल का यह व्यवहार यह भी दर्शाता है कि वे शिक्षक दिवस पर केवल प्रतीकात्मक माला पहनाने में विश्वास नहीं रखते,बल्कि पूरे समय शिक्षकों की समस्याओं के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था के लिए शिक्षकों की सुरक्षा और सुविधा आवश्यक है – और वे इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते दिखे।
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खरसिया विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा को लेकर उनकी दूरदर्शी सोच,प्रशासनिक समन्वय और समस्या-समाधान की सक्रिय नीति उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है। आम जनता, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बसे शिक्षक समाज को जब इस प्रकार का नेतृत्व मिलता है, तब लोकतंत्र का उद्देश्य पूर्ण होता है।
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आज जब अधिकतर नेता केवल सोशल मीडिया या मंचीय चर्चाओं में सीमित रहते हैं, उमेश पटेल उन कुछ चुनिंदा जनप्रतिनिधियों में हैं जो मौन रहकर भी बड़े कार्य कर जाते हैं। शिक्षक समाज का हित, विद्यार्थियों का भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता – इन तीनों स्तंभों को सशक्त करने की उनकी सोच व कार्यशैली अनुकरणीय है।
उमेश पटेल न केवल खरसिया की शान हैं, बल्कि प्रदेश के लिए भी नेतृत्व के नए आदर्श हैं।




