अनुकम्पा नियुक्ति के लिए लागू तृतीय श्रेणी के पदों से 10 प्रतिशत कोटा हटाने की कर्मचारी संघ ने शासन से मांग की

लंबित अनुकम्पा नियुक्ति प्रकरणों के भ्रष्टाचार मुक्त त्वरित निराकरण हेतु जिला स्तर पर शिविर लगाने की मांग
रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री व छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष तथा राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने सरकार द्वारा दिवंगत शासकीय सेवको के अवयस्क परिजनों को बालिग होने पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने के केबिनेट में लिये गए निर्णय को स्वागत योग्य मानते हुये कहा है, कि जब तक अनुकम्पा नियुक्ति नियमावली में तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के पदों से 10 प्रतिशत कोटा (सीलिंग) के प्रावधान को हटाया नही जायेगा, तब तक कोई भी तत्कालीन लाभ दिवंगत शासकीय सेवक के परिजनों को इस आदेश से नही मिलेगा। इस कारण सरकार का यह महत्वपूर्ण केबिनेट का निर्णय निरर्थक बनकर रह जायेगा।
उल्लेखनीय है कि अनुकम्पा नियुक्ति नियम में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिये कोई कोटा (सीलिंग) निर्धारित नही है परन्तु तृतीय श्रेणी के पदों में कोटा निर्धारित होने के कारण रिक्त पदों के पर वर्षो से अनुकम्पा नियुक्ति बाधित है और हर विभाग में मृत शासकीय सेवको के परिजनों द्वारा तृतीय श्रेणी के पदों पर नियुक्ति चाहे जाने के कारण नियमावली में सीलिंग के वजह से अनुकम्पा नियुक्ति के सैकड़ों आवेदन रिक्त पद होते हुए भी अनिर्णय के हालत में विभागों में पड़े हुए हैं और परिजन अनुकम्पा नियुक्ति के लिये दर दर भटक रहे हैं और अंत मे थक हारकर नोकरी खोने के भय से तृतीय श्रेणी के पद पर नियुक्ति में देर होने से कारण कई महीने के वेतन भत्ते गवानें के बाद स्नातक-स्नातकोत्तर होने के बावजूद चतुर्थ श्रेणी के चौकीदार-चपरासी जैसे पदों पर नियुक्ति को बाध्य होकर मान्य करने को मजबूर हो रहे है।
जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि यह अनुकम्पा नियुक्ति नियमावली पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में बनाया गया है,इसको तैयार करने में संवेदनशीलता को ताक में रख दिया गया है इसमें आई ए एस अधिकारियों की विशेष भूमिका रही है, जिन्हें दिवंगत शासकीय सेवको के परिजनों के दुख से कोई वास्ता नही होने के कारण अनुकम्पा नियुक्ति को बाधित करने हेतु जानबूझकर ऐसा किया गया है और कर्मचारी संगठनों द्वारा बार बार मांग करने पर नई सरकार के डेढ़ वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी नियमावली में संशोधन कर कोटा ( सीलिंग) हटाने पर कोई विचार सरकार के ध्यान में मंत्रालय के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नही लाया जा रहा है।
अत: सरकार को चतुर्थ श्रेणी के पदों की भाँति तृतीय श्रेणी के पदों पर भी अनुकम्पा नियुक्ति हेतु कोटा(सीलिंग)प्रावधान को तत्काल समाप्त कर देना चाहिए।ताकि लंबित अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरणों का शीघ्र निपटारा सम्भव हो सके और अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करने प्रत्येक जिले में कलेक्टर कार्यालय में शिविर लगाकर सम्पूर्ण पारदर्शिता के साथ विभागवार प्रकरण के निराकरण के निर्देश जारी करना चाहिए ।
ष्ट्व परिवीक्षा अवधि बढाना और वेतन में कटौती अनुचित
केबिनेट के एक अन्य निर्णय के परिपालन में वित्त विभाग द्वारा 28 जुलाई को जारी आदेश में सीधी भर्ती हेतु परिवीक्षा में नियुक्त किये जाने वाले कर्मचारियों के निश्चित(फि़ क्स)वेतन में कटौती कर क्रमश: साल दर साल वृद्धि करना भी एक अजीब निर्णय है,देश मे ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करने वाला छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश है, साथ ही परिवीक्षा अवधि को भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष करने का अनुचित आदेश जारी करने वाला छत्तीसगढ़ पहला प्रदेश होगा। कर्मचारियों को अपने को नियमित कर्मचारी घोषित करने अब एक साल अधिक इंतजार करना होगा।दोनो ही निर्णय के आदेश कर्मचारी हित मे नही है, वित्तीय अनुशासन के नाम पर आई ए एस अफसरों के सलाह पर सरकार द्वारा कर्मचारी जगत के लिये जा रहे आलोक तांत्रिक निर्णय से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, इसलिए सरकार को इन निर्णयों पर पुनर्विचार कर इसे निरस्त कर देना चाहिए।




