
कलो आई
आज मेरे दोनो आखोँ मे पानी है
एक मे शहीद नंदकुमार पटेल के लिए
और दूसरे मे
सरकारी व्यवस्था की नाकामी के लिए
ये मै ही नहीं कहता
हम सब की जुबानी है।
पर क्या करें
जब हथौड़ी से सुनार सोने को पीटता है.
सोना शोर नहीं मचाता
लेकिन लोहार जब लोहे के हथौडे से लोहा को पीटता है लोहे की चीख निकती है
इससे पहले कि पिघलती हुई पीडा
बहकर बिखर जाये अपनी थरथराती ऊंगलियों को विश्राम देता हूँ

शहीद नंदकुमार पटेल
शहीद दिनेश पटेल श्रद्धांजलि..।



