
रायगढ़। खनिज विभाग रायगढ़ में पूर्व में पदस्थ बाबू एलपी पाल को आय से अधिक संपत्ति के मामले में न्यायालय ने जेल भेज दिया है। उन पर आय से अधिक खर्च करने का आरोप एसीबी की ओर से लगाया गया। प्रारंभिक साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने जमानत आवेदन खारिज करते हुए उसे जेल दाखिल करने का आदेश दे दिया है।
रायगढ़ जिला भ्रष्टाचार के नक्शे पर चमकता हुआ नजर आता है। ऐसी गई घटनाएं होती रही हैं जिससे इस बात की पुष्टि भी होती है। एंटी करप्शन ब्यूरो की रेड, इन्कम टैक्स की रेड आदि को देखें तो रायगढ़ में बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध होते रहे हैं। अब जो मामला सामने आया है उसने खनिज विभाग पर सवाल खड़ा कर दिया है। 2020 तक खनिज विभाग में हेड क्लर्क के रूप में पदस्थ एलपी पाल को एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया था। उनके विरुद्ध 2019 में आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण दर्ज किया गया था। 30 नवंबर 2020 को पाल बाबू रिटायर भी हो गए। अब एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार कर चालान प्रस्तुत किया। विशेष न्यायाधीश किरण कुमार जांगड़े की अदालत में उन्हें प्रस्तुत किया गया। आरोप अजमानतीय व गंभीर प्रकार के होने के कारण अदालत ने जमानत आवेदन खारिज करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया है। 10 सितंबर 1981 से 25 मई 2018 के बीच कार्यकाल को एसीबी ने चिन्हित किया था। 1 मई 2001 से 9 दिसंबर 2019 के बीच आय-व्यय का लेखा-जोखा निकाला गया। एसीबी ने दाखिल अभियोग पत्र में तथ्य प्रस्तुत किए। इस अवधि में पाल बाबू की कुल आय 1,85,07,722 रुपए होती है जबकि इस दौरान कुल 2,62,55,693 रुपए व्यय किए गए। इसमें पूर्व का बचत राशि 5,88,809 भी जोड़ा गया है।
77 लाख रुपए अधिक खर्च
एसीबी के प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार गणना करने पर इन 19 सालों में आरोपी ने 77,47,971 रुपए अधिक खर्च किए। हालांकि आरोपी एलपी पाल की ओर से वैध रूप से प्राप्त संपत्ति से अर्जित आय के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। आरोपी के पिता पटवारी थे, जिनकी पेंशन को नहीं जोड़ा गया। उसके ससुर ने अपनी पुत्री के नाम पर जो संपत्ति क्रय की उसे भी शामिल नहीं किया गया। आरोपी को पिता की संपत्ति से बंटवारे में मिली कृषि भूमि की आय को भी नहीं जोड़ा गया।
अदालत ने गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए जमानत देने से इंकार कर जेल भेजने का आदेश पारित किया है।


