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हर काम में विजय दिलाने वाली है वैजयंती माला

काम में सफलता नहीं मिल रही है और हर जगह निराशा व हार का सामना करना पड़ता है तो आपकी समस्याओं का समाधान वैजयंती माला कर सकती है।

शास्त्रों में बताया गया है कि श्रीकृष्ण को 6 चीजें विशेष प्रिय हैं। ये चीजें हैं गाय, बांसुरी, मोर पंख, माखन, मिश्री और वैजयंती माला वैजयंती एक पौधे का नाम है।

इसके पत्ते थोड़े लंबे होते हैं, चौड़ाई कम होती है। इसमें टहनियां नहीं होती हैं। वैजयंती में लगने वाले फूल लाल या पीले रंग के होते हैं। ये फूल गुच्छों में लगते हैं। फूलों के साथ ही छोटे-छोटे गोल दाने भी होते हैं, जो कि थोड़े कठोर होते हैं। इन दानों में छेद करके माला बनाई जाती है और इसे गले में धारण किया जाता है।बैजन्ती के पौधे की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसके बीज में माला बनाने के लिए कोई छेद नहीं करना पड़ता। यह माला भगवान विषणु जी की सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।

रत्न शास्त्र के जानकारों का कहना है कि वैजयंती माला हर काम में विजय दिलाने की क्षमता रखती है। इसे सही रूप से प्राण प्रतिष्ठा कराने के बाद पहनना चाहिए।

आंगन मे…

वैजयंती माला एक ऐसी माला है जो सभी कार्यों में विजय दिला सकती है। इसका प्रयोग भगवान श्रीकृष्ण, माता दुर्गा, मां काली और दूसरे कई देवी देवता करते थे। रत्न के जानकार मानते हैं कि अगर इस माला को विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठित करके धारण किया जाए तो इसके परिणाम आपको तत्काल मिल सकते हैं। कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जिसमें रुकावट आएगी।

वैजयंती माला को धारण करने वाला इंद्र के समान जीतने वाला बन जाता है। श्रीकृष्ण के समान सभी को मोहित करने वाला बन जाता है और महर्षि नारद के समान विद्वान बन जाता है। इस सिद्ध माला को धारण करने वाला हर जगह विजय प्राप्त करता है। उसके सभी कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं। यदि किसी काम में लंबे समय से बाधा आ रही है तो वह काम आसानी से बन जाता है। यह माला शत्रुओं का नाश भी करती है। रत्न शास्त्र के जानकार बताते हैं कि वैजयंती माला को सिद्ध करने के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। पूरा फल पाने के लिए जरूरी है कि माला विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद ही पहनी जाए।

ऐसे धारण करें वैजयंती माला

भगवान सत्यनारायण और पूर्णिमां या विष्णु भगवान के अवतारों की आराधना करनी है तो शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार और लक्ष्मी जी की साधना करनी शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को स्नान करके पूजन करना चाहिए। ॐ वैष्णवायै नम: के जप की एक माला पूरी करें। इसके बाद गुरु मंत्र का जाप करें। गुरुमंत्र नहीं है तो ऊं नम: भगवते वासुदेवाय’ का 108 बार जाप करें। इसके बाद मंदिर में जाकर गरीबों को भोजन कराएं। मिष्ठान दें, तब माला धारण करें।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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