शासकीय लाल बहादुर शास्त्री स्कूल खरसिया के विद्यार्थी रत्न आदर्श तंबोली के 17 वीं जयंती पर विशेष आलेख

अपने जीवन के पल पल विद्यार्थी जीवन के समर्पित करने वाले विद्यार्थी रत्न आदर्श तंबोली के विचार सभी भाई बहन दोस्त युवा पीढ़ी को सदैव प्रेरणा देते रहेंगे 01 फरवरी 2020 को उनकी 17वीं जयंती है उनका जन्म छत्तीसगढ़ के ग्राम मौहापाली तहसील खरसिया जिला रायगढ़ में एक साधारण परिवार में 01 फरवरी 2003 को इनका जन्म हुआ था तथा 8 दिसंबर 2019 को उनका निधन हुआ आज भले ही वे हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी लोकप्रियता सभी विद्यार्थी क्षितिज पर ध्रुव तारें की तरह अटल है, हृदय से अत्यंत ही भावुक लेकिन तेजस्वी आदर्श तंबोली जो लच्छेदार विद्यार्थी के जरिए लाखों लोगो को घंटों तक बांधे रखने की क्षमता रखते थे । आदर्श तंबोली अपनी छोटी-सी उम्र 16 वर्ष पढ़ाई में अच्छा अनुभव रहा वे सन् 2018-19 में दसवीं बोर्ड में छत्तीसगढ़ के होनहार प्रतिभावान टॉपर विद्यार्थी रहे उन्हें 96.33% अंक हासिल किया। वे 8 वीं में भी खरसिया ब्लॉक में राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था एवं 10 वीं में राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में अपना स्थान बनाए रखा था। प्राथमिक शाला की पढ़ाई नगर पालिका बाल मंदिर खरसिया में की वहां भी अपना टॉपर छवि को बनाए रखा था।उन्होंने प्रारम्भिक पढ़ाई शेन जोन्स स्कूल से कि 6 माह पढ़ने के के पश्चात पारिवारिक स्थिति सही नहीं होने के कारण सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई की उसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण सरकारी स्कूल के पहली कक्षा में नाम लिखवा दिया गया। पहली से लेकर पांचवी तक की पढ़ाई नगर पालिका बाल मंदिर में कि वहां सभी मैडम की दिलों में आदर्श ने अपनी जगह बना ली चाहे वह वैष्णव मैडम हो ठाकुर मैडम हो या नामदेव मैडम हो। सभी मैडम बोलते जैसा नाम वैसा काम “आदर्श नाम है यह सही में आदर्श है” क्लास में पहली से लेकर पांचवी तक टॉपर था नगर पालिका बाल मंदिर में। बाल मंदिर के बाद छठवीं से लेकर 11वीं तक की पढ़ाई शासकीय लाल बहादुर शास्त्री स्कूल में कर रहा था सभी शिक्षक को अपने गुरु मानता था। मैडम सर कुछ भी बोलते हां सर हां मैडम। पढ़ाई में कोई भी विषय हो चाहे हिन्दी हो चाहे गणित हो या भौतिकी हो उसके लिए सभी विषय समान था सभी विषय को समान मानता था। कोई भी विषय कठिन नहीं लगता था सभी विषय को समान रूप से पढ़ाई करता था । घर में माता पिता और एक छोटा भाई जिसका नाम अनुभव है। माता-पिता के आंख के तारे आदर्श को खाने के लिए कहा जाता तो वह बोलता 2 मिनट और पढ़ने दो। एक बार में खाने के लिए आता ही नहीं था और अपने छोटे भाई को बहुत प्यार करता था जो बोलने के लिए शब्द नहीं है।आज आदर्श के माता-पिता का चिराग बुझ गया जो की आज बराई (थवाईत,तंबोली) समाज के लिए बहुत बड़ा झटका है जिसकी छति पूर्ति संभव नहीं है।
जब तक सूरज चांद रहेगा
आदर्श भैय्या का नाम रहेगा




