
हनुमंत कथा रसामृत में भक्ति, वैदिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम
खरसिया। चपले कि पावन धरा में 27 मई से 03 जून 2026 तक श्री हनुमंत कथा रसामृत का दिव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ।
चपले की पावन धरा इन दिनों श्री हनुमंत कथा रसामृत के दिव्य आयोजन से भक्तिमय हो उठी है। कथा पंडाल में प्रतिदिन उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ केवल कथा श्रवण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आत्मिक शांति, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी अनुभव कर रही है। श्रीधाम अयोध्या से पधारीं पूज्य साध्वी राधा किशोरी जी अपने ओजस्वी एवं हृदयस्पर्शी प्रवचनों से भक्तों को धर्म, भक्ति और जीवन के गूढ़ रहस्यों से परिचित करा रही हैं।

कथा के दौरान साध्वी जी ने कहा कि “जिसने उलझाया है, वही सुलझाएगा। मनुष्य को अपनी चिंताओं का भार स्वयं नहीं उठाना चाहिए, बल्कि उसे प्रभु चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। जब जीवन के मार्ग कठिन प्रतीत हों, तब विश्वास रखिए कि ईश्वर की कृपा ही समाधान का द्वार खोलती है।” उनके इन शब्दों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया और वातावरण श्रद्धा तथा विश्वास के भावों से भर उठा।
वैदिक अनुष्ठानों से गूंज रहा कथा परिसर
कथा स्थल पर वैदिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना, यज्ञीय कर्म और धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न किए जा रहे हैं। आचार्य योगेंद्र दुबे, अश्विनी दुबे, गजानंद द्विवेदी, मुकेश द्विवेदी, रिपुसुदन मिश्रा एवं मनोज द्विवेदी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठानों का संचालन किया जा रहा है।
हवन कुंड से उठती पवित्र आहुतियों की सुगंध, मंत्रों की गूंज और शंखध्वनि से संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक चेतना से आलोकित दिखाई दे रहा है। ऐसा प्रतीत होता है मानो भक्ति और वैदिक संस्कृति का प्राचीन स्वरूप पुनः साकार होकर श्रद्धालुओं के मध्य उपस्थित हो गया हो।
“मारने वाला है भगवान, बचाने वाला भी भगवान”
अपने प्रवचन में साध्वी राधा किशोरी जी ने कहा कि संसार में होने वाली प्रत्येक घटना ईश्वर की इच्छा से संचालित होती है। मनुष्य को अहंकार त्यागकर प्रभु पर विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि “मारने वाला है भगवान, बचाने वाला भी भगवान। मनुष्य केवल कर्म कर सकता है, परिणाम का अधिकार परमात्मा के हाथ में है।”
उनके इस कथन ने जीवन की अनिश्चितताओं के बीच आस्था और समर्पण का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने इसे जीवन के संघर्षों में धैर्य और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा के रूप में ग्रहण किया।
भक्ति और संस्कारों का महापर्व
कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भगवान श्री हनुमान के गुणों, उनके त्याग, सेवा, निष्ठा और समर्पण के आदर्शों का श्रवण कर रहे हैं। कथा के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार, सदाचार और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का संदेश भी दिया जा रहा है।
ग्रामीण अंचल में आयोजित यह आध्यात्मिक आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का भी केंद्र बन गया है। कथा स्थल पर हर आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें आज भी आस्था और परंपरा के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
आस्था का प्रवाह निरंतर
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श्री हनुमंत कथा रसामृत के प्रत्येक दिवस के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। भक्ति, वैदिक अनुष्ठान और साध्वी राधा किशोरी जी के अमृतमय प्रवचनों से चपले की पावन धरा इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा के एक विराट केंद्र में परिवर्तित हो गई है, जहां हर श्रद्धालु अपने मन की उलझनों का समाधान और प्रभु कृपा का अनुभव प्राप्त कर रहा है।
श्रीराम जन्मोत्सव के साथ गूंजेगा हनुमान जन्मोत्सव का मंगलगान
चपले की पावन धरा पर आयोजित श्री हनुमंत कथा रसामृत में कल श्रद्धालुओं को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अवसर प्राप्त होगा। कथा के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दिव्य जन्म प्रसंग के साथ-साथ संकटमोचन, भक्त शिरोमणि श्रीहनुमान जी के जन्मोत्सव का भी भावपूर्ण श्रवण लाभ मिलेगा।
कथावाचिका साध्वी राधा किशोरी जी द्वारा श्रीराम जन्म की अलौकिक लीलाओं,धर्म स्थापना के उद्देश्य तथा श्रीहनुमान जी के अवतरण की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जाएगा। कथा पंडाल में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोषों के बीच भक्तिभाव का विशेष वातावरण निर्मित होने की संभावना है।

आयोजकों ने समस्त श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम एवं श्रीहनुमान जन्मोत्सव के इस दिव्य प्रसंग का श्रवण कर आध्यात्मिक पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है। श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति के संगम से सुसज्जित यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना हुआ है।




