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टेमटेमा में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा: कृष्ण बाल लीला के प्रसंग में श्रद्धा का उमड़ा प्रवाह

खरसिया। क्षेत्र के ग्राम टेमटेमा में 24 फरवरी से 2 मार्च तक आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण एवं हरिवंश पुराण कथा के क्रम में शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। साध्वी राधा किशोरी जी के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा हरिवंश पुराण का रसास्वादन करने कथा पंडाल में खरसिया जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार पटेल भी पहुंचे और धर्मसभा में सहभागिता निभाई।

श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन मिलता है। ये लीलाएँ उनके जन्म से लेकर गोकुल और वृंदावन में बिताए बचपन की घटनाओं पर केंद्रित हैं। इनमें पूतना वध, कालिय नाग दमन, माखन चोरी, गोवर्धन धारण और यशोदा के साथ वात्सल्य प्रसंग प्रमुख हैं। इन घटनाओं को केवल चमत्कारिक प्रसंग नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और अधर्म के विनाश के प्रतीक रूप में देखा जाता है।

श्रीमद्भागवत में वर्णित बाल लीलाएँ धार्मिक आख्यानों से आगे बढ़कर गहरे दार्शनिक अर्थ प्रस्तुत करती हैं।
धर्म की स्थापना: बाल्य अवस्था में भी अधर्म का विनाश ईश्वरीय शक्ति के निरंतर सक्रिय रहने का संकेत है।
भक्ति का स्वरूप: कृष्ण की बाल छवि भक्त और भगवान के बीच प्रेम, वात्सल्य और स्नेह आधारित संबंध को स्थापित करती है।
सामाजिक संदेश: अहंकार त्याग, प्रकृति संरक्षण और करुणा जैसे मूल्यों को इन लीलाओं के माध्यम से समझाया गया है।
आध्यात्मिक दृष्टि: लीला परंपरा ईश्वर को दंडदाता नहीं, बल्कि स्नेहमय और सुलभ सत्ता के रूप में प्रस्तुत करती है।

आयोजन में साध्वी राधा किशोरी ने अपने प्रवचन में श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी लीलाओं तथा भक्तों के प्रति उनकी करुणा का विस्तृत वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक वातावरण में सहभागिता की। आयोजन स्थल पर भजन-कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धा और आस्था का वातावरण निर्मित किया।

फाल्गुन मास के अवसर पर आयोजित यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक चेतना के उद्देश्य से किया जा रहा है। श्रीमद्भागवत एवं हरिवंश पुराण में वर्णित प्रसंगों के माध्यम से धर्म, कर्तव्य और भक्ति मार्ग के सिद्धांतों को जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आयोजनों की परंपरा सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम मानी जाती है।

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कथा में वर्णित श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों—निर्मलता, करुणा और लोकमंगल—का संदेश भी देती हैं। धार्मिक आयोजनों में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक व्यक्तियों की उपस्थिति स्थानीय स्तर पर सामाजिक सहभागिता को बढ़ाती है तथा सामुदायिक एकजुटता को सुदृढ़ करती है। इससे क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति जनरुचि और धार्मिक चेतना का विस्तार होता है।

आयोजन के आगामी दिनों में अन्य पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार कथा के समापन तक धर्म,आस्था और सामाजिक सद्भाव के संदेश को व्यापक रूप से जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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