खरसियाछत्तीसगढ़

खरसिया का ओवर ब्रिज कब लेगा मूर्त रूप पूछ रहे राहगीर…

धूप,बारिश में रोजाना लगता है जाम, लोग हो रहे हलाकान…

खरसिया। प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले धर्म नगरी में ऐसी कामगार कि शून्यता देखी जा रही है कि आम जनता को एकमात्र रेल्वे फाटक पर वर्षों से बारिश में भीगने की या फिर धूप में जलने की मजबूरी बनी हुई है।

बता दें कि नगर दो भागों में बंटे नगर में एक ओर मुख्य बाजार है, तो दूसरी ओर सभी महत्वपूर्ण अधिकारियों के दफ्तर। ऐसे में प्रतिदिन हजारों ग्रामीण एवं नगरीय जनता को रेल्वे फाटक को पार करने की मजबूरी बनी रहती है। वहीं मुम्बई हावड़ा मुख्य रेल मार्ग में यात्री गाडिय़ों के परिचालन में कमी के बावजूद लाईन तीन से चार हो गई,रेल्वे फाटक बंद होने के समय में चार गुना इजाफा देखा जा रहा है। इस पार से उस पार जाने के लिए घंटों फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है, वह भी बारिश के दिनों में भीगते हुए तो गर्मियों के दिनों में अपने ही बदन को झुलसाते हुए।

आम के साथ खास भी होते है परेशान…

प्रदेश देश की राजनीति में नगर का महत्वपूर्ण स्थान,फिर भी नगर के प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा के चुनाव के वक्त 1988 से ओवरब्रिज की मांग की जा रही है। परंतु यह मांग अब तक अधर में लटकी हुई है।

नगर मे चर्चा होते सुन लेगे विधानसभा चुनाव के समय चौधरी सा के सफल प्रयास से ओवरब्रिज के लिए जगह-जगह ड्रिल मशीन से खोदकर चट्टान की खोज की गई और कुछ को चिन्हित भी किया गया।परीवारिक सदस्य और सरकार रेल्वे मे दखल होने पश्चात चौधरी सा प्रयास…?

रेलवे क्रॉसिंग पर खड़े लोगों की स्थिति देखी जाए तो छोटे-छोटे बच्चों को धूप में कभी रुमाल तो कभी आंचल से ढकती हुई माताओं की पीड़ा देखी जा सकती है। यह भी देखा जा सकता है कि रेल्वे फाटक गिरने के बाद एंबुलेंस भी मरीज को लेकर खड़ी रहती है।

प्रदेश के मुखिया रायगढ़ प्रवास के दौरान बनने की आस तो जगा दिए परंतु जमीनी हकीकत ढाक के तीन पात कहावत को चरितार्थ होने से लोगों मे आक्रोश नजर आ रहा है समय रहते ओवरब्रिज का निर्माण न होने से कहीं…

परंतु जिम्मेदारो को ना जाने यह सब कुछ क्यों नहीं दिखाई…

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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