34 सेकंड में तहस-नहस हो गया धराली, 20 फुट ऊंची इमारतें भी जमींदोज,रौंगटे खड़े कर देंगी तबाही…

उत्तराखंड में इस समय कुदरती आफत पीछा नहीं छोड़ रही है। मंगलवार को उत्तरकाशी के धराली गांव में अचानक बादल फट गया। बादल फटते ही पहाड़ का मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। लोगों में इस भयावह घटना को देखते ही चीख-पुकार मच गई। बादल फटने से खीर गंगा ऊफान पर आ गई। राली बाजार व आसपास के क्षेत्र के भारी नुकसान पहुंचा है। बादल फटने के बाद पहाड़ों से मलबा नीचे उतरकर आ गया। इस दौरान लोग जान बचाने के लिए यहां-वहां भागते नजर आए। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। जहां थोड़ी देर पहले तक रौनक थी, शांति थी और सब कुछ सामान्य था। वहां अब चीत्कारें हैं, तबाही है और विनाश की तस्वीरें हैं। धराली के अलावा वहां सुखी टॉप के पास बादल फटा है।
धराली में जहां बादल फटा है, वो गंगोत्री धाम से सिर्फ 18 किलोमीटर की दूरी पर है, ये जगह भारतीय सेना के हर्षिल कैंप से करीब चार किलोमीटर दूर है। तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि महज 34 सेकंड्स में धराली की रिहाइश बादल फटने के बाद आई बाढ़ की चपेट में आ गई। बादल फटने के बाद खीर गंगा नदी के उफनाने से बाढ़ आई है। धराली देहरादून से 218 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हादसे के बाद सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन राहत बचाव की कोशिश कर रहा है।
लडख़ड़ाते कदम,जान बचाने के लिए मलबे में रेंगती जिंदगी

चारों तरफ सिल्ट ही सिल्ट,जमींदोज घर, होटल और लॉज, जहां तक नजर जाए वहां तक पसरा तबाही का मंजर… इस आपदा में जान बचाने के लिए जद्दोजहद करते एक शख्स का वीडियो सामने आया है, इसमें साफ दिख रहा है कि वह मलबे से किस तरह रेंगते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का प्रयास कर रहा है। उसकी हर कोशिश जीवन की ओर बढ़ते एक कदम की तरह है। यह घटना है उत्तरकाशी के धराली गांव की जहां बादल फटने से भारी तबाही हुई है। प्रकृति ने उत्तरकाशी में ऐसा कहर बरपाया कि पल भर में सब कुछ तहस-नहस हो गया, जिसने भी इस तबाही के वीडियो देखे, वह सन्न रह गया।
उत्तरकाशी हादसे के बाद हरिद्वार में भी अलर्टगंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचा
उत्तरकाशी में बाढ़ की घटना के बाद हरिद्वार जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट हो गए हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया, जिससे संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हरिद्वार में लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा का प्रवाह काफी तेज हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि उत्तरकाशी की घटना के प्रभाव से गंगा का जलस्तर अगले 8 से 12 घंटों में और अधिक बढ़ सकता है। इससे पहले ही प्रशासन ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सावधान कर दिया है। पुलिस ने लाउडस्पीकर और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को चेतावनी दी है कि वे गंगा घाटों और नदियों के किनारे न जाएं।
रेस्क्यू में सामने आ रही बड़ी चुनौतियां

कीचड़ और स्लिट बनी सबसे बड़ी रुकावट : तेज बहाव के बाद अब गांव में पानी कम हो गया है, लेकिन चारों ओर गाढ़ी कीचड़, गाद और भारी मलबा फैल गया है। बचाव दलों को किसी भी व्यक्ति तक पहुंचने से पहले कई फुट तक कीचड़ हटानी पड़ रही है। इससे राहत की रफ्तार बहुत धीमी हो गई है।
खराब मौसम और लगातार बारिश: इलाके में अब भी रुक-रुककर बारिश जारी है, जिससे जमीन फिसलन भरी हो गई है और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले दिन भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे राहत कार्यों के और प्रभावित होने की आशंका है।पहाड़ी भूगोल
और दुर्गम रास्ते: धराली जैसे पहाड़ी गांव में पहले से ही रास्ते संकरे और जोखिमभरे होते हैं। अब कई सडक़ें टूट चुकी हैं, 163 से अधिक रास्ते बंद हैं, जिनमें पांच राष्ट्रीय राजमार्ग, सात राज्य राजमार्ग और दो बॉर्डर रोड्स शामिल हैं। इससे राहत टीमें समय पर प्रभावित गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

संपर्क साधन पूरी तरह टूटे: धराली और आसपास के गांवों से मोबाइल नेटवर्क ठप हो गया है। कमजोर कनेक्टिविटी के चलते लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा, जिससे सही जानकारी जुटाना और राहत भेजना बेहद मुश्किल हो गया है।
हेलिकॉप्टर मदद भी रुकी: खराब मौसम और नजदीकी हेलिपैड को हुए नुकसान के कारण हवाई राहत ऑपरेशन भी शुरू नहीं हो सका है। एम्स ऋषिकेश में बेड तैयार हैं, एंबुलेंस रवाना की गई हैं, लेकिन हवाई मार्ग से फंसे लोगों को निकालना संभव नहीं हो पा रहा।




