दीपा पटेल को मिला “आदियोगी योग भूषण अवार्ड 2025”: छत्तीसगढ़ की बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का मान…

योग और नृत्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिल्ली में हुआ सम्मानित, हजारों महिलाओं की प्रेरणा बनीं
रायपुर, छत्तीसगढ़ — राजधानी रायपुर की प्रतिष्ठित योग प्रशिक्षिका और सामाजिक चेतना की प्रतीक श्रीमती दीपा पटेल को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में “आदियोगी योग भूषण अवार्ड 2025” से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ (ABYOGASMS FOUNDATION) द्वारा योग महाकुंभ 2025 और 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदान किया गया।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “Yoga for One Earth, One Health” रही, जो दीपा पटेल के कार्यों की भावना और दिशा के बिल्कुल अनुरूप है। योग और नृत्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने और विशेष रूप से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में उनके योगदान को इस सम्मान के माध्यम से देशभर में सराहा गया।
दीपा पटेल, जो कि Shakti Yoga and Dance Studio, रायपुर की संस्थापक एवं निदेशक हैं, पिछले वर्षों से योग और नृत्य के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। जनवरी 2025 में शुरू हुआ उनका संस्थान कम समय में रायपुर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख फिटनेस एवं आर्ट हब के रूप में उभरा है। इस संस्था में पारंपरिक योग, आधुनिक फिटनेस तकनीकों और नृत्य की कलाओं को रचनात्मक रूप में समाहित कर सभी उम्र के लोगों को प्रशिक्षित किया जाता है।

दीपा पटेल न सिर्फ एक प्रशिक्षित योगाचार्या हैं, बल्कि एक माँ, गृहिणी और सामाजिक प्रेरक के रूप में भी अपनी पहचान रखती हैं। उन्होंने दो बच्चों की परवरिश के साथ अपने जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा और यही जज़्बा उन्हें अन्य महिलाओं से अलग बनाता है। उनकी सोच है – “स्वस्थ तन और सशक्त मन ही किसी समाज की असली शक्ति हैं।”
दिल्ली के इस आयोजन में कारगिल युद्ध के नायक कर्नल त्यागी, स्वामी अमित देव, वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया तथा ABYOGASMS FOUNDATION के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष मंगेश त्रिवेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन्होंने दीपा पटेल को मंच पर स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
दीपा पटेल का यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। यह सिद्ध करता है कि प्रतिबद्धता,परिश्रम और सामाजिक चेतना के साथ कोई भी महिला किसी भी क्षेत्र में मुकाम हासिल कर सकती है।
उनका यह सफर आज की युवतियों और गृहिणियों को यह संदेश देता है कि अगर आत्मविश्वास और आत्मबल हो, तो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ भी सपनों को उड़ान दी जा सकती है।


