
खरसिया। मिडिया को मिली जानकारी अनुसार जनपद पंचायत खरसिया में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। इस बार आरोप किसी सामान्य व्यक्ति पर नहीं,बल्कि खुद तकनीकी सहायक पर लगा है,जो सरकारी योजना के क्रियान्वयन का जिम्मेदार होता है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, तकनीकी सहायक ने अपने ही माता-पिता और भाई के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनवाए और बिना किसी कार्यस्थल पर उपस्थिति या काम किए, उनके नाम पर लगभग 1.30 लाख रुपये की मजदूरी राशि सरकारी खजाने से निकलवा ली। बताया जा रहा है कि जिन नामों पर यह फर्जीवाड़ा किया गया, वे जांजगीर-चांपा जिले के निवासी हैं और खरसिया पंचायत बरगढ़ खोला क्षेत्र के ग्राम पंचायत क्षेत्र में उनका कोई वास्ता नहीं है।
प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत?
यह मामला सामने आते ही पंचायत स्तर पर हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं,बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की मिलीभगत का नतीजा है। सवाल उठता है कि जब जॉब कार्ड बनते हैं और भुगतान होता है, तो उसकी जांच व सत्यापन किस स्तर पर होता है?
जनता में आक्रोश, कड़ी कार्यवाही की मांग
इस घटना से आम नागरिकों और जागरूक लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि मनरेगा जैसी योजना गरीबों की जीवनरेखा है और यदि इसी में भ्रष्टाचार हो तो फिर गरीब कहां जाएं?
मांगें क्या हैं?
- आरोपी तकनीकी सहायक को तत्काल निलंबित किया जाए।
- उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्यवाही की जाए।
- जनपद पंचायत क्षेत्र की मनरेगा योजनाओं का ऑडिट कराया जाए।
- इस मामले की उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए,ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सरकार की चुप्पी पर सवाल ?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार की भ्रष्टाचार पर पकड़ कमजोर हो चुकी है? या फिर ऐसे भ्रष्ट अधिकारी प्रशासनिक संरक्षण में हैं? यदि समय रहते इस तरह के मामलों पर सख्त कार्यवाही नहीं हुई,तो जनता का सरकारी योजनाओं से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।
जवाब चाहिए… और जल्दी चाहिए!
सरकार और प्रशासन से अब जनता को जवाब चाहिए। सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कदम देखने की अपेक्षा है, जिससे यह संदेश जाए कि भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।




