चलता है समायोजन का खेल…
रायगढ़।सेवा सहकारी समितियों में चल रही गड़बड़ी को रोकने के लिए एक ओर शासन हर वर्ष नियमों में कुछ संशोधन करती है तो वहीं दूसरी ओर सरकार के अंग के रूप में ही कार्य करने वाली समिति के प्रबंधक खाद बीज वितरण से लेकर खरीदी तक में गड़बड़ी को लेकर चर्चित रहते हैं, लेकिन ऐसे प्रबंधकों पर सख्त कार्यवाही न होने के कारण बाद में फिर से यही समितियों में जमे हुए नजर आते हैं।कई धान खरीदी केंद्र में अनियमितता होने के उपरांत धान खरीदी समाप्त होने के बाद यहां पर बोगस धान खरीदी की शिकायत मिली जिसकी जांच में काफी बड़े पैमाने पर बोगस धान खरीदी करना पुष्ट हुआ। इस मामले को लेकर समिति प्रबंधक को निलंबित किया गया और ऑपरेटर व अन्य पर एफआईआर दर्ज कराया गया, लेकिन बाद में यह प्रकरण अपील में गया और फिर से उसकी बहाली हो गई। जिसके बाद खाद व बीज वितरण के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी जांच में मिली। जिसके आधार पर फिर से प्रबंधक को निलंबन किया गया है। सूत्रों की माने तो संबंधित प्रबंधक बहाली के लिए फिर से एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। इसी तरह जिले अन्य कई केंद्र हैं जहां पर इस तरह के कार्य हुए हैं।
विडंबना: निलंबन के बाद फिर दे दी जाती है जिम्मेदारी
विवादों में रहने वाले कुछ धान खरीदी केंद्रों में इस बार फिर से विवादित प्रबंधक ही किसानों से धान खरीदी करते हुए नजर आएंगे। इसके पीछे कारण यह है कि या तो संबंधित प्रबंधक को हटाया नहीं गया या फिर निलंबन के बाद फिर से बहाल हो गए।
धान खरीदी के दौरान गड़बड़ी को छिपाने के लिए जहां जीरो शार्टेज का खेल खेला जाता है इसके बाद खाद बीज के वितरण के दौरान फिर से गड़बड़ी कर उक्त कमी को पूरा किया जाता है। कुल मिला कर देखा जाए तो समायोजन का यह चक्र चलते रहता है, यही कारण है कि केंद्रों में गड़बड़ी रूकने का नाम नहीं ले रहा है



