
✍️ धरमजयगढ़ (रायगढ़):
अब जंगली हाथियों की हलचल की जानकारी सीधे ग्रामीणों के मोबाइल तक पहुंचेगी। हाथी-मानव द्वंद को कम करने के उद्देश्य से ‘गज संकेत’ नामक मोबाइल एप को धरमजयगढ़ वन मंडल में सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन स्थानीय काष्ठागार में किया गया।
प्रशिक्षिका रायपुर से पहुंचीं, स्टाफ और ट्रैकर्स को दी विस्तृत जानकारी
रायपुर से आई विशेषज्ञ प्रशिक्षिका ने वन मंडल में कार्यरत क्षेत्रीय अधिकारियों, वनकर्मियों, हाथी मित्र दल और हाथी ट्रैकरों को एप के उपयोग, पंजीयन प्रक्रिया और चेतावनी प्रणाली के बारे में गहन जानकारी दी। बताया गया कि गज संकेत एप एक ऐसा डिजिटल उपकरण है, जिससे लोगों को हाथियों के इलाके में प्रवेश या गतिविधियों की सूचना टेक्स्ट मैसेज और कॉल के जरिए पहले ही मिल जाएगी।
कैसे काम करता है ‘गज संकेत’ एप?
- एप में पहले ग्रामीणों के मोबाइल नंबर रजिस्टर किए जाते हैं।
- जब किसी इलाके में हाथी दिखाई देते हैं, तो वनकर्मी उस लोकेशन की सूचना एप में अपलोड करते हैं।
- इसके बाद, उस क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों को स्वतः ही मैसेज और कॉल के माध्यम से अलर्ट मिल जाता है।
- इससे ग्रामीण खुद भी सतर्क हो सकते हैं और आसपास के लोगों को भी जानकारी देकर उन्हें सुरक्षित कर सकते हैं।
धरमजयगढ़: एक संवेदनशील हाथी क्षेत्र

धरमजयगढ़ वन मंडल छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यहां मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में यह एप न केवल जान-माल की हानि रोकने में मदद करेगा बल्कि ग्रामीणों और वन विभाग के बीच संवाद की एक मजबूत डिजिटल कड़ी के रूप में भी कार्य करेगा।
वन विभाग के अनुसार, गज संकेत एप से जुड़ने की प्रक्रिया लगातार जारी है और भविष्य में और अधिक गांवों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
संवाद सहयोगी कहते हैं:
“अगर समय रहते अलर्ट मिल जाए तो हम खुद को भी और अपने मवेशियों को भी बचा सकते हैं। यह ऐप हमारे लिए वरदान साबित हो सकता है।”
– प्रकाश भगत हाथी मित्र दल
डिजिटल तकनीक का ऐसा उपयोग धरमजयगढ़ जैसे आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में सुरक्षा और जागरूकता दोनों के लिए एक प्रभावी पहल है। गज संकेत एप के व्यापक प्रचार और सही उपयोग से निश्चित रूप से मानव-हाथी संघर्ष में बड़ी कमी लाई जा सकती है।




