सुपोषण अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। पुसौर के 28 आंगनबाड़ी केंद्रों में भ्रष्टाचार के आरोपों ने दावों की हवा निकाल दी है। आंगनबाड़ी के बच्चों के अभिभावकों की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि उन्हें कोई लाभ नहीं मिला और फर्जी बिल बनाकर पूरी रकम डकार ली गई। पुसौर के निश्चय लक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह द्वारा 28 आंगनबाड़ी केंद्रों में फर्जी बिल बनाकर रकम गबन कर ली गई है। महिला समूह को रेडी-टू-ईट फूड के साथ, अंडा, गुड़, दाल, चावल, सब्जी आदि वितरण करना था ताकि बच्चे कुपोषण के दायरे से बाहर निकल सकें। कोई भी सामग्री वितरित नहीं की गई। केवल कागजों में सामग्री वितरण दिखाकर फर्जी बिल बना दिए गए। पुसौर के परियोजना अधिकारी रमूला रानी रॉय और गोर्रा व कोड़ातराई सेक्टर पर्यवेक्षक कविता मिश्रा पर मिलीभगत कर फर्जी बिलों का पास करने का आरोप लगाया गया है। कलेक्टर ने गंभीर आरोपों की जांच करने डिप्टी कलेक्टर को आदेश दिया है। इस बार महिला एवं बाल विकास विभाग के भ्रष्टाचार के सभी पन्ने सामने आएंगे। कोड़ातराई, छातामुड़ा, कुंजेडबरी, जकेला, डूमरपाली, औरदा, बेलपाली, लोहरसिंग, झारमुड़ा आदि में बच्चों को पोषण आहार मिला ही नहीं है क्योंकि समूह ने निर्माण ही नहीं किया। दूसरी सामग्रियां क्रय करने के बिल तो हैं, लेकिन ये बच्चों को मिले ही नहीं।
जनपद उपाध्यक्ष का समूह, रॉय-मिश्रा की जुगलबंदी
पुसौर के आंगनबाडिय़ों में हुए भ्रष्टाचार की कई कहानियां निकलकर सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक निश्चय लक्ष्मी स्व सहायता समूह का गठन पुसौर जनपद उपाध्यक्ष गोपी चौधरी ने कराया है। नवंबर में समूहों के बदलने की सुगबुगाहट हुई तो रेडी टू ईट बनाना ही बंद कर दिया गया। वहीं सुपरवाइजर से प्रमोट हुई रमूला रॉय पुटकापुरी में रहती हैं, जहां उनकी बेटी एएनएम है। वे समय से निरीक्षण करने पुसौर पहुंचती ही नहीं हैं। कविता मिश्रा को गोर्रा और कोड़ातराई सेक्टर मिला था। इन दोनों का निरीक्षण नहीं किया जाता क्योंकि दोनों के बीच सेटिंग है।