
आज अंतिम दिवस पर होगी फूलों की होली व महाआरती
राबर्टसन –प्रभु की भक्ति मे सर्वोत्तम माधुर्यभाव भक्ती है, जिसे हर मनुष्य को करना चाहिए ।
राधा गोविंद धाम अमनदुला (मालखरौदा) में 6 अप्रैल से 21 अप्रैल तक दिव्य दार्शनिक प्रवचन एवं मधुर अमृतमय संकीर्तन का आयोजन जगद्गुरू कृपालु सतसंग कल्याण समिति अमनदुला (मालखरौदा छ.ग.) के द्वारा किया गया है | जो प्रतिदिन सायं 5 बजे से 7 बजे तक का समय रखा गया है | इस दिव्य दार्शनिक प्रवचन को विश्व के मूल पंचम जगद्गुरू 1008 श्री कृपालु जी महाराज की परम प्रिय प्रचारिका वृन्दावन व राधा गोविंद धाम अमनदुला वासिनी परम पूज्य सुश्री श्रीश्वरी देवी जी के मुखारबिंद से वर्णन किया जा रहा है | दिव्य प्रवचन के 14 वां दिवस में दीदी जी ने भक्ति के भावों का वर्णन करते हुए कहा कि, ये चार प्रकार से किया जा सकता है |
जिसमें प्रथम दास्यभाव अर्थात प्रभु को अपना स्वामी मानते हुए सेवक की तरह मन में भाव रखकर कर सकते हैं | दूसरा सख्यभाव से अर्थात हम प्रभु जी को अपने बाल सखा का भाव मन में रखते हुए मान सकते हैं | तीसरा वात्सल्यभाव अर्थात प्रभु को हम अपने पुत्र प्रेम की भाव रखते हुए भक्ति कर सकते हैं | इन सभी भावों से सबसे श्रेष्ठ व चतुर्थ माधुर्यभाव है ।

माधुर्यभाव ही सर्वाधिक मधुरभाव है । उसी भाव से उपासना करने से सर्वश्रेष्ठ रस की आनंद प्राप्त हो सकती है । माधुर्यभाव का मोटा सा अभिप्राय यह है कि वे हमारे सर्वस्व हैं, हम उन्हे जब जो चाहें मान लें । अर्थात प्रियतम के प्रेम की तरह भाव के साथ भक्ति कर सकते हैं और माधुर्यभाव की ही भक्ती हर मनुष्य को करना चाहिए, क्योकिं इसमें आठ भक्ति की प्राप्ति होती है | इन सभी भावों की भक्ती का अनेकों उदाहरण देकर भगवान श्री कृष्ण की अनंत भक्ति करने की बात कही गई | क्योकिं कृष्ण अवतार में ही अन्य अवतार से चार गुण अधिक के साथ अर्थात 64 गुणों से स्वयं भगवान अवतरित हुए थे | आज अंतिम दिवस पर साधना,ध्यान कैसे करें पर प्रवचन के माध्यम से बताया जाएगा | और महाआरती के साथ साथ फूलों की होली खेलने का कार्यक्रम रखा गया है | इस दिव्य प्रवचन के आज अंतिम दिवस पर जगद्गुरू कृपालु सतसंग कल्याण समिति अमनदुला की ओर से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का निवेदन किया गया है |




