
रायगढ़। पर्यावरण प्रदूषण को लेकर एनजीटी में दायर याचिका के बाद अब सरकारी एजेंसियां एक्टिव हो गई हैं। इस मामले में गठित ज्वाइंट कमेटी एक बार फिर रायगढ़ पहुंची है। कमेटी सदस्यों ने बुधवार को आधा दर्जन पावर प्लांटों का जायजा लिया और फ्लाई एश की स्थिति देखी। आज कुछ अफसरों के साथ बैठक बुलाई गई है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वैज्ञानिक डॉ. भारद्वाज आदिराजू, नीरी नागपुर के वरिष्ठ प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. पारस रंजन पुजारी और सीपीसीबी भोपाल के वैज्ञानिक डॉ. आरपी मिश्रा रायगढ़ पहुंचे हैं। बुधवार को क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग की टीम के साथ इन्होंने जेएसडब्यू, रायगढ़ इस्पात, आरआर एनर्जी, सन स्टील, रुपाणाधाम प्लांट और इंड सिनर्जी का निरीक्षण किया। इस दौरान उत्सर्जित फ्लाई एश और उसके निराकरण की जानकारी ली गई। प्लांटों से फैल रहे प्रदूषण को किसी भी हाल में नियंत्रित करने की जरूरत है।
कैसे हो निराकरण, आज मंथन
ज्वाइंट कमेटी ने आज उप संचालक खनिज भूपेंद्र चंद्राकर और डीजीएमएस के अधिकारियों की बैठक रखी है। दरअसल, चालू कोयला खदानों में भी ओबी के साथ फ्लाई एश की निश्चित मात्रा मिलाकर भराव करना है, लेकिन इसके लिए डीजीएमएस आसानी से अनुमति नहीं देता। माइंस सेफ्टी के नियमों की वजह से अनुमति देना मुश्किल होता है। प्लांट मालिक भी फ्लाई एश के साथ मिट्टी मिलाकर खदान भराव करने से बचते हैं। प्रतिबंधित खदानों में सीधे एश ही डाली जा रही है। भविष्य में भू-जल स्त्रोतों पर इसका असर पडऩा तय है।




