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गवर्नर कांफ्रेंस में पीएम मोदी बोले- शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम होना चाहिए

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई शिक्षा नीति पर आयोजित राज्यपालों की कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया. सरकार की ओर से बीते दिनों ही नई शिक्षा नीति का ऐलान किया गया है, जिसपर अभी भी मंथन जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देश के लक्ष्यों को शिक्षा नीति और व्यवस्था के जरिए ही पूरा किया जा सकता है. पीएम ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम होना चाहिए.

नई शिक्षा नीति पर पीएम मोदी बोले कि इस नीति को तैयार करने में लाखों लोगों से बात की गई, जिनमें छात्र-शिक्षक-अभिभावक सभी शामिल थे. प्रधानमंत्री बोले कि आज हर किसी को ये नीति अपनी लग रही है, जो सुझाव लोग देखना चाहते थे वो दिख रहे हैं. अब देश में नई शिक्षा नीति को लेकर देश में उसके लागू करने के तरीके पर संवाद हो रहा है, ये इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे 21वें सदी के भारत का निर्माण होना है.

संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में नौकरियों को लेकर चर्चा हो रही है, ऐसे में शिक्षा नीति को ज्ञान और स्किल पर तैयार करेगी. ये नीति न्यू इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के मिशन को पूरा करेगी. पीएम ने कहा कि लंबे वक्त से ये मांग उठ रही थी कि बच्चे बैग और बोर्ड एग्जाम में दब रहे हैं, ऐसे में अब इस मुश्किल को कम किया गया है. पीएम बोले कि अब कोई भी छात्र किसी भी स्ट्रीम को कभी भी ले सकता है और छोड़ सकता है.

पीएम मोदी ने कहा कि देश में ही बढ़िया कैंपस होंगे, जिससे बाहर पढ़ाई करने की कोशिशें कम होंगी. साथ ही कोशिश की गई है कि ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा मिले. पीएम ने कहा कि जैसे विदेश नीति किसी सरकार की ना होकर देश की होती है, ये शिक्षा नीति भी किसी सरकार नहीं बल्कि देश की शिक्षा नीति है.

इस सम्मेलन के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ट्वीट कर जानकारी दी गई. पीएम ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘7 सितंबर को सुबह 10:30 बजे मैं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और इसके परिवर्तनकारी प्रभाव पर राष्ट्रपति, राज्यपालों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ एक सम्मेलन में शामिल रहूंगा. इस सम्मेलन से होने वाला उद्धार भारत को ज्ञान का केंद्र बनाने के हमारे प्रयासों को मजबूत करेगा.’

कार्यक्रम में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अलावा कई राज्यों के शिक्षा मंत्री, अधिकारी, विश्वविद्यालयों के कुलपति व अन्य लोगों ने हिस्सा लिया.

बता दें कि मोदी सरकार की ओर से करीब 34 साल बाद देश की नई शिक्षा नीति पेश की गई है. एक कमेटी के द्वारा लंबे समय तक के मंथन के बाद कई सुझाव पेश किए गए थे, जिन्हें पास किया गया. इसके तहत शुरुआती वक्त में ही बच्चों को पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल शिक्षा, उच्च शिक्षा में रोजगार के अवसरों को पैदा करना जैसे बड़े फैसले लिए गए हैं.

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