
मालखरौदा में बह रही है अमृतमय दिव्य प्रवचन
राबर्टसन -15 दिवसीय मानव कल्याण के अमृतमय दिव्य प्रवचन में दीदी जी नें महापुरुष तत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना महापुरुष की शरणागत किये किसी भी जीव को भगवत प्राप्ति नहीं हो सकती ।
मालखरौदा सक्ती रोड़ पर स्थित राधा गोविंद धाम अमनदुला (मालखरौदा छ.ग.) में 6 अप्रैल से 21अप्रैल तक दिव्य दार्शनिक प्रवचन का आयोजन हो रहा है । जिसमें विश्व के पंचम मूल जगद्गुरू स्वामी श्री कृपालु जी महाराज की कृपापात्र प्रचारिका वृंदावन व राधा गोविंद धाम अमनदुला वासिनी सुश्री श्रीश्वरी देवी जी के मुखारबिंद से प्रवचन का वर्णन किया जा रहा है। दीदी जी का यह दिव्य मानव कल्याण प्रवचन कार्यक्रम शतक (100 बार) है । जिसमे श्री दीदी जी अपने मुखारबिंद से भागवत, गीता, रामायण, वेद सहित अन्य ग्रंथो का उदाहरणों के साथ दिव्य प्रवचन का रसास्वादन कराया जा रहा है। प्रवचन के सप्तम दिवस में महापुरुष तत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना महापुरुष की शरणागत किये किसी भी जीव को भगवत प्राप्ति नहीं हो सकती। भागवत से उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि जब तक किसी वास्तविक महापुरुष की चरण रज से हम अपने आप को अभिव्यक्ति नहीं कर लेते तब तक निवृत्ति तो बहुत दूर की बात है। हम ईश्वरीय जगत में पहला कदम भी नहीं रख सकते। प्रारंभ में तत्व ज्ञान प्रदान करने से लेकर साधन पथ कठिनाइयों का समाधान करना ये सब गुरू ही करता है।
गुरू शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए दीदी जी ने कहा कि जो जीव को माया निवृत्ति करा दे और जीव को ईश्वरीय प्रेम प्रदान करें वही वास्तविक गुरू है। रामायण से उदाहरण देते हुए बताए कि ‘गुरू बिनु भव निधि तरइ न कोई’, ‘गुरू बिनु होई कि ज्ञान’ । वास्तविक गुरू की शरण में जाने से ही हमारा काम बन सकता है । लेकिन ऐसा वही कर सकता है, जिसकी स्वयं की माया निवृत्ति हो चुकी हो । और जिसने स्वयं ईश्वर को प्राप्त कर लिया हो । और वे समस्त वेदों शास्त्रों का ज्ञाता भी हो और स्वयं ने ईश्वर प्राप्ति की हो | यह दिव्य दार्शनिक प्रवचन को प्रतिदिन सायं 5 बजे से सायं 7 बजे तक का समय रखा गया है । दिव्य प्रवचन को सुनने बड़ी संख्या में दूर – दूर से महिला व पुरूष आ रहे हैं ।




