
रायगढ़। शहर के कयाघाट प्रगति नगर से जूटमिल तक प्रस्तावित मरीन ड्राइव सड़क परियोजना को लेकर छिड़ा विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। सोमवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और तोड़-फोड़ से प्रभावित लोगों से मुलाकात कर सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर विकास विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया।
🔴 कांग्रेस का आरोप: विकास नहीं, गरीबों के आशियानों का विनाश

रायगढ़ दौरे पर पहुंचे पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सबसे पहले प्रगति नगर कयाघाट पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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उन्होंने घंटों तक प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और पीड़ितों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने इस कार्यवाही को “प्रशासनिक आतंकवाद” की संज्ञा दी और कहा:
“विकास के नाम पर गरीबों के घर उजाड़े जा रहे हैं, और सम्पन्न वर्ग के सपने बसाए जा रहे हैं। कांग्रेस इन प्रभावितों को अकेला नहीं छोड़ेगी,सड़क से लेकर सदन तक इनकी आवाज़ उठाई जाएगी।”
विस्थापितों के लिए बनाए गए ‘हाईटेक’ घरों को भी दिखावटी बताया और तंज कसा कि:

“भाजपा के नेता एक रात अपने परिवार के साथ इन घरों में बिताकर देखें,तब पता चलेगा कि ये कितने ‘हाईटेक’ हैं।”
उन्होंने कांग्रेस द्वारा निर्णायक आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता,आंदोलन जारी रहेगा।
🔵 भाजपा का पलटवार: कांग्रेस कर रही भ्रामक राजनीति,जनता को गुमराह करने की कोशिश
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता मुकेश जैन ने कांग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:

“दीपक बैज के बयान गैर-जिम्मेदाराना और मनगढ़ंत हैं। जिस रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट को वे अभी का निर्णय बता रहे हैं, उसका मास्टर प्लान 2011-12 में ही बन चुका था। कांग्रेस अब मुद्दाविहीन हो चुकी है और बेतुके आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रही है।”
भाजपा का दावा है कि तोड़फोड़ से पहले लोगों को सूचित किया गया और उनकी सहमति से सड़क की चौड़ाई भी कम की गई ताकि कम से कम लोग प्रभावित हों। विस्थापन के लिए त्वरित राहत के तहत घर दिए गए और 75 हजार रुपये की सहायता भी सीएसआर मद से सुनिश्चित की गई है।

मुकेश जैन ने कहा कि कांग्रेस के पास न तो कोई ठोस मुद्दा है,न ही नेतृत्व में सामर्थ्य, इसलिए वे ओपी चौधरी जैसे कर्मठ नेता की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
“रायगढ़ के विकास को लेकर कांग्रेस कभी गंभीर नहीं रही, इसलिए अब जब तेजी से काम हो रहा है, तो उन्हें तकलीफ हो रही है। कांग्रेस का यह राजनीतिक ड्रामा जनता समझ चुकी है।”
🔄 जनता के बीच दो पक्ष,भरोसे की तलाश

जहां एक ओर प्रभावित लोग अपनी समस्याओं और दर्द को लेकर न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बनता जा रहा है। कांग्रेस इसे जनहित का मुद्दा मान रही है, जबकि भाजपा इसे विकास विरोधी मानसिकता करार दे रही है।
मां विहार कॉलोनी में शिफ्ट किए गए प्रभावितों को सुविधा देने में जुटा प्रशासन

प्रगति नगर से मां विहार कॉलोनी में शिफ्ट किए गए लोगों के लिए प्रशासन ने सभी जरूरी इंतेज़ाम किए हैं। यहां पहुंच रहे लोगों के शिफ्टिंग में सहयोग के साथ साथ पूरे परिसर की साफ सफाई और व्यवस्था के लिए नगर निगम व अन्य विभागों से 400 से ज्यादा लोगों की टीम लगाई गई है। मां विहार कॉलोनी में शिफ्ट हुए लोगों के लिए नाश्ते और भोजन का प्रबंध किया गया है।

यहां स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल कैंप लगाया गया है, मेडिकल वैन के साथ डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की टीम यहां मौजूद है। साथ ही यहां शिफ्ट हो रहे परिवार के बच्चों के स्कूल में दाखिले में सुविधा की दृष्टि से शिक्षा विभाग ने यहां कैंप लगाया है। शिफ्ट हो रहे लोगों को राशन कार्ड सम्बन्धी दिक्कत न हो इसके यहां खाद्य विभाग की टीम ने हेल्प डेस्क बनाया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि मां विहार कॉलोनी में लगभग 100 परिवारों को आवास आबंटित कर दिया गया है।

यहां नगर निगम की टीम लोगों को शिफ्टिंग में सहयोग के साथ ही आवास में इलेक्ट्रिक और प्लंबिंग के कार्यों के लिए भी टीम लगाई गई है।
📌 : क्या सियासत की आग में झुलसते रहेंगे आम लोग?

रायगढ़ में चल रहा मरीन ड्राइव विवाद अब स्थानीय प्रशासनिक कार्यवाही से बढ़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस का आक्रामक रुख यह बताता है कि वह इसे जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा पूरी ताकत से इसे विकास का मॉडल बताकर अपना बचाव कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में असली सवाल यह है कि:
- क्या प्रभावितों की समस्याओं का समय रहते समाधान होगा?
- क्या दोनों पक्ष राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर जनता के हित में एकजुट हो सकते हैं?
- और क्या रायगढ़ का विकास किसी के विस्थापन की कीमत पर ही होगा?
जनता इन सवालों के जवाबों की प्रतीक्षा कर रही है।




