
✍️वरिष्ठ पत्रकार शिव राजपूत@रायगढ़। रायगढ़ जिले के छोटे से गाँव अमलीपाली की ममता ओगरे ने न केवल अपने पिता का सपना साकार किया, बल्कि अपनी मेहनत से समाज में एक मिसाल कायम की है। हाल ही में चयनित एसआई ममता के चेहरे पर कामयाबी की मुस्कान और उनके पिता सुरेश ओगरे की आँखों में गर्व और खुशी की नमी को देखकर यह बात और भी स्पष्ट हो जाती है कि बेटियाँ किसी से कम नहीं होतीं। सुरेश ओगरे, जो एक साधारण किसान हैं, ने हमेशा से अपनी बेटी ममता को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सपना को हकीकत में बदल
गाँव से साइकिल पर शहर आते-जाते हुए बाप-बेटी का किसी महिला पुलिसकर्मी या पुलिस वाहन को देखकर मन में यह कल्पना करना कि एक दिन ममता भी इसी भूमिका में होगी, आज एक हकीकत बन चुकी है। यह गौरतलब है कि ममता ने बिना किसी निजी ट्यूशन या कोचिंग के सिर्फ सरकारी स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई की। तमाम आर्थिक अभावों के बावजूद उसने अपनी मेहनत, लगन और अपने पिता के आशीर्वाद से यह मुकाम हासिल किया।
समाजसेवी सीताराम ने पुसौर कियोस्क बैंक में ममता और उनके पिता से मुलाकात कर उनकी इस सफलता का सम्मान करने की योजना बनाई है, ताकि गाँव और समाज में एक सकारात्मक संदेश पहुँच सके।
अभाव कभी रोड़ा नहीं बनता
ममता की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अभाव कभी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकता। माता-पिता का आशीर्वाद, अपने परिवार का सहयोग, और आत्म-विश्वास ही किसी भी लक्ष्य तक पहुँचने की सच्ची कुंजी हैं। ममता ओगरे की कहानी न सिर्फ उनके गाँव बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।




