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सफलता की कहानी, गोबर आगे बढ़ा रहा है दूध का व्यवसाय

गायों के गोबर बेचकर मिले पैसों से खरीदी एक और गाय
रूरल एन्टप्रेन्यैरशिप का शानदार उदाहरण

रायगढ़ । जिले के हिर्री गांव के ललित कुमार ने गोधन न्याय योजना में गोबर बेचा और उससे मिले पैसे से एक गाय खरीदी। ग्रामीणों में पशुधन का क्रय-विक्रय काफी आम बात है। खेती किसानी से जुड़े लोग इस उद्यम में लगे रहते हैं। लेकिन ललित का गाय खरीदना काफी खास है। उसने गाय खरीदने के लिए जिस प्रकार राशि एकत्रित की है वह इसे विशेष बनाता है। उसने गायों के गोबर से एक और गाय खरीदने की राशि एकत्रित की है। यह मुमकिन हुआ है छत्तीसगढ़ शासन की गोधन न्याय योजना से, जिसमें गोबर बेच कर ललित ने 8 हजार रुपये कमाए और किश्तों में 55 हजार रुपये की होलेस्टिन फ्रिसियन नस्ल गाय खरीदी है। यह नस्ल दूध उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है।

 ललित ने पांच साल पहले पहले दूध का व्यवसाय चालू करने पहली गाय खरीदी। धीरे-धीरे उसने अपना व्यवसाय आगे बढ़ाया। इन पांच सालों में उसने दूध बेचकर कमाए पैसों का उपयोग गायों की देखभाल और घर गृहस्थी चलाने में की।  इसी पैसे को बचाकर उसने पिछले पांच सालों में 5 से 6 गाय भी खरीद कर काम आगे बढ़ाया। लेकिन पिछले लगभग एक से डेढ़ माह में ही उसने गोबर से इतनी राशि इक_ी कर ली की किश्तों में एक नयी गाय खरीद ली। इस बात से बेहद अभिभूत ललित बताते हैं की गाय खरीदने के लिए इतनी जल्दी पूँजी इकठ्ठा होना मेरे लिए काफी बड़ी बात है। अभी उनके पास 10 पशु हैं और वह रोजाना लगभग 60 से 70 किलो गोबर बेचते है।

ललित बताते है कि वह एक बड़ी डेयरी खोलना चाहते है। इसके लिये काफी समय से प्रयासरत भी है किन्तु काम की गति उतनी तेज नहीं हो पा रही थी। गोधन न्याय योजना से उन्हें यह विश्वास मिल रहा है कि शीघ्र ही वह अपने सपने को साकार कर पायेंगे। इसके लिये वह मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल व छत्तीसगढ़ शासन को धन्यवाद देते हुये कहते है कि स्थानीय संसाधनों से ही बिना किसी अतिरिक्त निवेश के ग्रामीणजनों के लिये पंूजी इकट्ठा करने की इससे बेहतर योजना नहीं हो सकती। पशुपालकों को सीधा लाभ होता ही है इससे बनाये जा रहे वर्मी कम्पोस्ट तथा गोबर के अन्य उत्पादों से रोजगार के नये अवसर भी पैदा हो रहे है। गोबर से बनी खाद जो कि भूमि की उर्वरता बढ़ाने से लेकर मानव स्वास्थ्य के लिये लाभकारी फसल उत्पादन के लिये कितना महत्वपूर्ण है यह सर्वविदित है। यह योजना निश्चय ही ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि की नई इबारत लिखेगी।

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