
खरसिया ।ग्राम चपले की पावन धरा पर आयोजित श्री हनुमंत कथा रसामृत के बीच शनिवार को प्रकृति ने अचानक अपना रौद्र रूप दिखाया। तेज आंधी,बारिश और तूफानी हवाओं ने कथा स्थल पर निर्मित विशाल पंडाल को क्षतिग्रस्त कर दिया, लेकिन आयोजकों, और ग्रामीणों की सजगता ने एक संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल दिया। समय रहते सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

28 मई से 3 जून 2026 तक आयोजित श्री हनुमंत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त करने पहुंच रहे हैं। शनिवार को कथा के दौरान अचानक मौसम का मिजाज बदला और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ वर्षा शुरू हो गई। परिस्थितियों की गंभीरता को भांपते हुए आयोजन समिति ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था संभाली और श्रद्धालुओं को सुरक्षित भवनों की ओर भेजने की व्यवस्था की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही क्षणों में तेज हवाओं ने पंडाल, तिरपाल और अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं को प्रभावित कर दिया। हालांकि पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम, अनुशासन और सहयोग की भावना देखने को मिली। ग्रामीणों, स्वयंसेवकों और आयोजन समिति के सदस्यों ने मिलकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की, जिससे सभी सुरक्षित रहे।
आंधी-तूफान से मंच,पंडाल एवं अन्य सामग्री को नुकसान पहुंचा है और आर्थिक क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बावजूद आयोजन समिति ने कथा की निरंतरता बनाए रखने का निर्णय लेते हुए आगामी कार्यक्रमों को श्री जानकी मंगल भवन प्रागण में संचालित करने की व्यवस्था प्रारंभ कर दी है।
श्री हनुमंत कथा रसामृत के दौरान आए तेज आंधी-तूफान और बारिश के बीच एक समय ऐसा भी आया जब बिजली गिरने की घटना ने उपस्थित लोगों की चिंता बढ़ा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाइटिंग व्यवस्था के समीप आकाशीय बिजली की तीव्र चमक और प्रभाव महसूस किया गया, जिससे टेंट एवं साउंड व्यवस्था में लगे कर्मियों के बीच कुछ क्षणों के लिए भय का वातावरण निर्मित हो गया।
हालांकि ईश्वर की कृपा, समय पर बरती गई सावधानी और उपस्थित लोगों की सतर्कता के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। टेंट और साउंड टीम के सदस्य सुरक्षित रहे तथा किसी प्रकार की जनहानि या गंभीर चोट की सूचना नहीं है। घटना के बाद तत्काल विद्युत उपकरणों को सुरक्षित किया गया और सभी कर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
आंधी, बारिश और बिजली की कड़कड़ाहट के बीच आयोजन समिति, स्वयंसेवकों एवं ग्रामीणों ने संयम का परिचय देते हुए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसी सजगता के कारण संभावित बड़ा हादसा टल गया।

प्राकृतिक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। क्षेत्रवासी ग्रामवासीयों ने एकजुट होकर व्यवस्था पुनर्स्थापित श्रीराम जानकी धर्मशाला में करने का संकल्प व्यक्त किया है। इस घटना ने यह भी सिद्ध किया कि जब श्रद्धा के साथ सतर्कता और सामूहिक सहयोग जुड़ जाता है, तब बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना भी सहजता से किया जा सकता है।




