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पर्यावरण मंत्री के जिले में फ्लाई ऐश की गुस्ताखी,सड़क पर बिखरा राखड़ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

खरसिया। पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच खरसिया क्षेत्र की स्टेट हाईवे-200 पर बिखरी फ्लाई ऐश व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रही है। पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के गृह क्षेत्र खरसिया की सेंद्रीपाली सड़क,जो खरसिया विधायक उमेश पटेल की कर्मभूमि भी है,दो राजनेताओं के क्षेत्र में औद्योगिक घराने द्वारा फ्लाई ऐश परिवहन में बरती गई कथित लापरवाही का खामियाजा स्टेट हाइवे 200 राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।

सड़क पर जगह-जगह बिखरी फ्लाई ऐश ने आवागमन को जोखिमपूर्ण बना दिया है। भारी वाहनों के गुजरने के साथ राखड़ उड़कर रिहाइसी फैल मे रही है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ आस-पास के ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेन्द्रीपाली के ग्रामीणों में इसे लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

औद्योगिक परिवहन या सड़क पर मनमानी?

सवाल यह है कि यदि फ्लाई ऐश का परिवहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जा रहा था,तो सड़क पर इतनी मात्रा में राखड़ बिखरी कैसे? परिवहन के दौरान वाहन को ढंकने, सामग्री को सुरक्षित रखने और सड़क पर गिरी राखड़ की तत्काल सफाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

औद्योगिक गतिविधियां विकास का हिस्सा हो सकती हैं,लेकिन विकास के नाम पर सड़क,पर्यावरण और आम नागरिकों की सुरक्षा को नजर अंदाज करने की छूट किसी को नहीं मिल सकती।

पर्यावरण विभाग की चुप्पी क्यों?

सबसे बड़ा सवाल पर्यावरण विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है। औद्योगिक क्षेत्र में फ्लाई ऐश के परिवहन और निस्तारण को लेकर नियम और जिम्मेदारियां तय हैं। इसके बावजूद यदि सड़क पर फ्लाई ऐश बिखरती रही और शिकायतों के बाद भी प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई,तो निगरानी तंत्र की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क पर परेशानी साफ दिखाई दे रही है, तो जिम्मेदार विभागों को दिखाई क्यों नहीं दे रही?

खरसिया पुलिस ने संभाला मोर्चा

स्थिति बिगड़ने के बाद खरसिया पुलिस की ओर से सड़क पर बिखरी फ्लाई ऐश को हटाकर आवागमन बहाल कराने की कवायद की गई। पुलिस की तत्परता ने तत्काल परेशानी कम जरूर की, लेकिन मूल सवाल वहीं खड़ा है—सड़क पर राखड़ पहुंची कैसे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

जिम्मेदारी तय हो,केवल सड़क साफ कर देना समाधान नहीं

फ्लाई ऐश हटाकर सड़क को बहाल कर देना तत्काल राहत है,स्थायी समाधान नहीं। प्रशासन को परिवहनकर्ता, संबंधित औद्योगिक इकाई और जिम्मेदार एजेंसी की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय करनी चाहिए।

खरसिया की सड़कों पर औद्योगिक परिवहन जरूरी हो सकता है,लेकिन सड़क जनता की है और उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पर्यावरण मंत्री के जिले में पर्यावरणीय नियमों और सड़क सुरक्षा की ऐसी अनदेखी पर संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। ग्रामीणों का आक्रोश तभी शांत होगा, जब कार्यवाही कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई देगी।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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