कलम खामोश हुई, लेकिन शेख आलम की इंसानियत हमेशा बोलती रहेगी…

धरमजयगढ़। कुछ लोग जीवन से विदा होते हैं, लेकिन समय की स्मृतियों से कभी विदा नहीं होते। वे अपने शब्दों, व्यवहार,कर्म और उन लोगों की दुआओं में जीवित रहते हैं, जिनके जीवन को उन्होंने किसी न किसी रूप में छुआ होता है। वरिष्ठ पत्रकार साथी शेख आलम का असमय सड़क हादसे ने ऐसी ही गहरी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना सहज नहीं।

शेख आलम का यूँ अचानक हमारे बीच से चले जाना धरमजयगढ़ की पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों के लिए गहरा आघात है। कल तक जिनसे मुलाकात होती थी, जिनकी आवाज सुनाई देती थी और जिनके चेहरे पर सहज मुस्कान दिखाई देती थी,उनके न रहने की सच्चाई को मन आज भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

पत्रकारिता उनके लिए महज पेशा नहीं, जनसरोकार का माध्यम थी। स्वराज एक्सप्रेस,लल्लूराम डॉट कॉम, मांड प्रवाह साप्ताहिक अखबार, खबर पे नजर वेब पोर्टल,राजधारी तक, IND 24 न्यूज सहित विभिन्न मीडिया मंचों से जुड़े रहते हुए उन्होंने दूर-दराज के गांवों, वंचितों और जरूरतमंदों की समस्याओं को आवाज देने का प्रयास किया। उनकी रिपोर्टिंग में केवल खबर नहीं होती थी, बल्कि उस खबर के पीछे खड़े इंसान का दर्द भी दिखाई देता था।
खबर से आगे,इंसान तक पहुंचती थी उनकी पत्रकारिता
शेख आलम की सबसे बड़ी पहचान उनकी कलम से भी आगे उनकी इंसानियत थी। दूर-दराज से कोई ग्रामीण अपनी समस्या लेकर आता और व्यवस्था की जटिलताओं में उलझ जाता,तो वे केवल कैमरा उठाकर खबर बनाने तक सीमित नहीं रहते। भरत चाय स्टॉल पर बैठकर उसकी बात सुनना, समस्या को समझना और समाधान के लिए संबंधित लोगों तक बात पहुंचाने का प्रयास करना उनके स्वभाव का हिस्सा था।
यही वह गुण था जिसने उन्हें केवल पत्रकार नहीं रहने दिया। वे अनेक जरूरतमंदों के लिए सहारा,साथी और अपनी बात कहने वाला अपना व्यक्ति बन गए थे।

उन्होंने जंगल के बेजुबान गजराज से लेकर आम आदमी के दर्द तक को अपनी कलम में जगह दी। जिन चेहरों पर व्यवस्था की उपेक्षा के कारण निराशा थी, वहां उन्होंने उम्मीद की एक किरण जगाने का प्रयास किया। उनके लिए पत्रकारिता का अर्थ केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ सामने रखना था।
आज उनकी कलम थम गई है, लेकिन जिन मुद्दों को उन्होंने उठाया, जिन लोगों की आवाज बने और जिन जरूरतमंदों के लिए खड़े हुए—उनकी स्मृतियां लंबे समय तक उनके होने का अहसास कराती रहेंगी।
धरमजयगढ़ की पत्रकारिता ने एक साथी खोया है,समाज ने एक संवेदनशील आवाज खोई है और अनेक जरूरतमंदों ने अपना एक ऐसा व्यक्ति खो दिया है, जिसके पास वे अपनी परेशानी लेकर बेझिझक पहुंच सकते थे।
शेख आलम भाई जान, आपका जाना केवल एक पत्रकार का जाना नहीं है। यह उस संवेदनशील मन का मौन हो जाना है, जो दूसरों के दर्द को अपना समझता था। आपकी मुस्कान,आपकी सरलता,आपकी कलम और सबसे बढ़कर आपकी इंसानियत उन सभी लोगों की स्मृतियों में सुरक्षित रहेगी, जिनसे आपका जीवन जुड़ा रहा।
कलम के सच्चे सिपाही शेख आलम को भावभीनी श्रद्धांजलि।
आप देह से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपकी यादें और आपके अच्छे कर्म हमेशा जीवित रहेंगे।
मरहूम शेख आलम जी को ख़िराज-ए-अक़ीदत
अल्लाह तआला उनकी मग़फ़िरत फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए।
परिवार एवं प्रियजनों को सब्र-ए-जमील अता हो। आमीन।
उस अज्ञात से आग्रह भाई जान के आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, मित्रों और पत्रकार साथियों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।
विनम्र नमन।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
ॐ शांति। 🙏💐



