खरसिया नगर से ग्रामीण अंचल तक चौक-चौराहों पर खुलेआम उपयोग,मवेशियों के लिए बन रही जानलेवा आफत…
खरसिया। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक प्रतिबंधित प्लास्टिक पन्नी (पॉलिथीन बैग)और सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। खासकर त्योहारों के दौरान बाजारों और चौक-चौराहों पर इसका उपयोग बढ़ जाता है। सवाल यह है कि जब प्रतिबंधित पन्नी के उपयोग और बिक्री पर नियम लागू हैं,तो आखिर इसकी आपूर्ति और बिक्री किन दुकानों से हो रही है?
स्थिति यह है कि बाजार और सड़कों के आस-पास फेंकी गई पन्नियों में खाद्य सामग्री के अवशेष पड़े रहते हैं। इन्हें गौवंश,बकरी,कुत्ते,भैंस सहित अन्य वन्य जीव,मवेशी निगल लेते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। पशु चिकित्सकों के अनुसार प्लास्टिक का सेवन मवेशियों के पाचन तंत्र में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है और कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
नियम मौजूद,फिर निगरानी पर सवाल क्यों?
प्रतिबंधित पन्नी की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी संबंधित निकायों और प्रशासनिक तंत्र की है। इसके बावजूद यदि बाजार में ऐसी सामग्री आसानी से उपलब्ध है तो नियमित जांच,जब्ती और कार्यवाही की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल अभियान चलाकर या कुछ दुकानों पर कार्यवाही करके समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। यह पता लगाना जरूरी है कि प्रतिबंधित पन्नी बाजार में पहुंच कहां से रही है और इसकी बिक्री कौन कर रहा है।
त्योहारों के दौरान बाजार में बढ़ने वाले प्लास्टिक कचरे को देखते हुए विशेष निगरानी,दुकानों की जांच और जागरूकता अभियान की जरूरत है। साथ ही नागरिकों से भी अपील है कि वे प्रतिबंधित पन्नी के बजाय कपड़े या अन्य पर्यावरण-अनुकूल थैलों का इस्तेमाल करें।
अब सवाल सिर्फ पन्नी पर प्रतिबंध का नहीं,बल्कि उस प्रतिबंध को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी का है। प्रशासन यदि नियमित निगरानी और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करे तो बाजार से लेकर सड़कों तक फैल रहे प्लास्टिक कचरे और उससे मवेशियों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।




