
खरसिया। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रीवास परिवार,चपले ग्राम क्षेत्रवासी ग्रामवासी द्वारा आयोजित श्री हनुमंत कथा में उस समय पूरा कथा पंडाल भक्ति और भावनाओं के सागर में डूब गया,जब साध्वी राधा किशोरी जी ने भगवान श्रीराम के वन गमन और केवट संवाद का मार्मिक प्रसंग गाई।
श्री हनुमंत कथा के दौरान जैसे-जैसे केवट की निष्काम भक्ति,समर्पण और प्रभु प्रेम का वर्णन आगे बढ़ा, साध्वी जी स्वयं भाव-विभोर हो उठीं और उनकी आंखों से अश्रुधारा बह निकली।

कथा मंच पर गूंजते शब्द केवल एक प्रसंग का वर्णन नहीं कर रहे थे, बल्कि भक्त और भगवान के उस अद्वितीय संबंध को जीवंत कर रहे थे, जहां लेन-देन का स्थान प्रेम ले लेता है और प्रतिफल की अपेक्षा भक्ति का स्वरूप धारण कर लेती है। जब केवट की वह विनम्र प्रार्थना सामने आई कि “प्रभु, आज मैं आपको गंगा पार करा रहा हूं, कल आप मुझे भवसागर से पार लगा दीजिए”, तब उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं।

साध्वी राधा किशोरी जी ने कहा कि केवट का चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अधिकार नहीं, समर्पण होता है; मांग नहीं, विश्वास होता है और स्वार्थ नहीं, केवल प्रेम होता है। केवट ने धन,वैभव या पुरस्कार नहीं मांगा, बल्कि प्रभु के चरणों में स्थान पाने की कामना की। यही भक्ति की सर्वोच्च अवस्था है।
कथा के दौरान वातावरण इतना भावमय हो गया कि पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालु मानो त्रेतायुग के उस पवित्र क्षण के साक्षी बन गए, जब गंगा तट पर एक साधारण नाविक ने अपनी निष्काम सेवा से स्वयं को अमर बना लिया था।
पुरुषोत्तम मास में चल रही श्री हनुमंत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की पुनर्स्मृति का माध्यम बन रही है। राम विवाह उत्सव की उल्लासपूर्ण छटा के बीच राम वनगमन और केवट संवाद जैसे प्रसंग यह संदेश दे रहे हैं कि जीवन का वास्तविक वैभव धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा और श्रद्धा में निहित है।

कथा का यह भावपूर्ण क्षण श्रद्धालुओं के हृदय में देर तक अंकित रहा। अनेक भक्तों ने इसे केवल श्रवण का अवसर नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला आध्यात्मिक अनुभव बताया। केवट की भक्ति और प्रभु श्रीराम की करुणा का यह प्रसंग एक बार फिर स्मरण करा गया कि भगवान तक पहुंचने का मार्ग वैभव से नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, निष्काम सेवा और अटूट विश्वास से होकर जाता है।
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