
नंदेली (रायगढ़)।छत्तीसगढ़ की पावन भूमि, जहां संस्कृति और आस्था का संगम होता है, वहां भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक पर्व नहीं,बल्कि जनमानस की आस्था का उत्सव बन जाती है।

ऐसा ही नजारा देखने को मिला रायगढ़ जिले के नंदेली गांव में,जहां द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की रथयात्रा पूरे भक्ति भाव, रंग और उल्लास के साथ मंदिर से निकाली गई।

प्राचीन परंपराओं के अनुसार,रथयात्रा के दिन सुबह मंदिर परिसर से विधिवत पूजन-अर्चन के पश्चात भगवान को रथ पर आरूढ़ किया गया। गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई यह यात्रा पूरे नंदेली में भक्तिरस का संचार करती रही। श्रद्धालु जयकारों के साथ रथ खींचते रहे और चारों ओर ‘जय जगन्नाथ’ की गूंज सुनाई देती रही। रथ यात्रा के दौरान भगवान की दिव्य मूर्तियों को फूल-मालाओं से सजाया गया और रथ को रंग-बिरंगे कपड़ों एवं ध्वजों से अलंकृत किया गया।
गांव में उल्लास और आनंद का वातावरण रहा। बच्चे नए-नए परिधानों में सज-धज कर रथयात्रा में शामिल हुए और गुब्बारों से खेलते हुए उल्लास का रंग बिखेरते दिखे। गांव के बुजुर्ग और महिलाएं पारंपरिक परिधानों में दर्शन हेतु उमड़े और भगवान के चरणों में अपनी आस्था अर्पित की।
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रथयात्रा का आयोजन गांव के प्रतिष्ठित पटेल परिवार द्वारा किया गया,जो वर्षों से इस परंपरा को संजोए हुए है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
रथयात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। रथ पार्टियों द्वारा नाच-गान की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ की महिमा पर आधारित गीतों एवं झांकी नृत्य से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

इस भव्य आयोजन में खगपति मालाकार, लेखराम मालाकार, त्रिलोकीनाथ मालाकार, बोधीराम मालाकार, नील कुमार मालाकार, पितांबर मालाकार, सुदामा मालाकार, खीरराम मालाकार, दुर्योधन विश्वकर्मा, शिशुपाल सिदार, गोसाईं बरेठ, प्रेमलाल यादव, सुशीपाल सिदार, आनंदराम यादव, अवधराम यादव, मंगतू सिदार, सोनसाय साहू, हरि निषाद, कंवलसिंह बरेठ, वेदराम विश्वकर्मा, गोविंद पाव, नरेंद्र निषाद सहित अन्य ग्रामवासी कलाकारों ने अपनी कला से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण
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इस रथयात्रा ने न केवल धार्मिक उत्सव का रूप लिया बल्कि यह ग्रामवासियों की एकता, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बनी। आयोजन में गांव के हर तबके का योगदान रहा, जिससे यह पर्व एक समग्र सामाजिक उत्सव बन गया।
समापन और आरती
शाम को रथ पुनः मंदिर परिसर में पहुंचने पर भव्य आरती और महाप्रसाद का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ लिया और अगले वर्ष पुनः इस पावन यात्रा में सम्मिलित होने की कामना की।
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नंदेली की रथयात्रा एक बार फिर यह सिद्ध कर गई कि भक्ति और परंपरा जब लोकसंस्कृति से जुड़ती है, तो वह केवल एक उत्सव नहीं रहती — वह गांव की आत्मा बन जाती है।



