

भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में अव्यवस्था की कई घटनाएं पिछले दिनों सामने आ चुकी हैं। मिलरों की गाडिय़ों को चार-पांच दिनों तक खाली नहीं कराना, प्लेटफॉर्म में डंप चावल भीगने पर मिलर को जिम्मेदार ठहराने समेत कई मामले हैं। अब खरसिया डिपो को लेकर कुछ जानकारी सामने आई है। चावल जल्दी जमा लेने के लिए बड़े ट्रकों में चावल परिवहन किया जाता है। गोदाम में ही धर्मकांटा से वजन के बाद चावल जमा लेने का प्रावधान है, लेकिन एफसीआई ने खरसिया के धर्मकांटा की क्षमता वृद्धि नहीं की है। इसकी मंजूरी आ गई है लेकिन काम नहीं हो रहा है। इसलिए 30 करीब टन से ज्यादा भारी गाडिय़ां निजी कांटे में तौल होती हैं। वहां के बाद गोदाम में चावल जमा होता है। एफसीआई के डिपो मैनेजर मनीष कुमार इससे पहले खरसिया में ही तैनात थे। उन्होंने भी इस समस्या का निराकरण नहीं किया। बताया जा रहा है कि निजी धर्मकांटा संचालक को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। यह भी पता चला है कि पिछले दिनों नापतौल विभाग ने डिपो के धर्मकांटा की जांच की थी।
ट्रक एक लाईन में नहीं तो गेट बंद
इस बीच एफसीआई के रायगढ़ ऑन डिपो चावल लेने में गाडिय़ों की रेलमपेल मची हुई है। कोई भी ट्रक कहीं से भी घुस जाता है। रोड पर जाम भी लगता है। इसके निराकरण के लिए एफसीआई मैनेजर ने नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ट्रकों को छातामुड़ा से एफसीआई की ओर रोड में एक साइड पर लाइन से लगाया जाएगा। एक लाइन नहीं होने पर गेट नहीं खोला जाएगा। एक बार में 20 ट्रकों को ही एंट्री दी जाएगी। लापरवाही बरतने पर राइस मिलर पर कार्रवाई की जाएगी।




