
आरओबी निर्माण कार्य से जुड़े कामगारों पर मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचाने का आरोप,पुलिस प्रशासन मौके पर मुस्तैद

खरसिया। खरसिया में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) से जुड़े विद्युत कार्य के दौरान शीतला माता मंदिर परिसर में कथित तौर पर तोड़-फोड़ किए जाने का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि शीतला माता मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है और धार्मिक स्थल के परिसर में किसी भी प्रकार की क्षति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों के अनुसार,आरओबी निर्माण से जुड़े विद्युत ठेकेदार के कामगारों द्वारा कार्य के दौरान मंदिर परिसर में तोड़-फोड़ किए जाने की बात सामने आई है। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी और मामले को लेकर रोष व्यक्त किया गया।
माता रानी पर आस्था रखने वाले नागरिकों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित ठेकेदार तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए। लोगों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक संपत्तियों और नागरिकों की आस्था का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
मौके पर पुलिस प्रशासन मुस्तैद

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन मौके पर मुस्तैद है। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो। प्रशासन द्वारा घटनास्थल की स्थिति और शिकायत से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मंदिर परिसर से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन को जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय तथ्यों की जांच करनी चाहिए। साथ ही,यदि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित नियमों अथवा सीमाओं का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
आस्था और विकास के बीच संतुलन की मांग

शीतला माता मंदिर को स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए नागरिकों ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों का विरोध नहीं,बल्कि धार्मिक स्थल की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि आरओबी जैसी महत्वपूर्ण परियोजना के निर्माण के दौरान संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों को आस-पास के धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्यवाही पर लोगों की नजर है। यदि जांच में मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्यवाही की जाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।




