रिहायशी इलाकों में अवैध पटाखा भंडारण से कैसे बचेगा क्षेत्र? हादसे की आशंका के बीच जिम्मेदारो की जिम्मेदारी में…

खरसिया। उड़ती खबर निकलकर आ है की रिहायशी इलाकों में कथित रूप से अवैध पटाखों के भंडारण की उड़ती खबर ने नगर के रहवासियों के धड़कन बढ़ा दिया है वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घनी आबादी के बीच ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री का भंडारण होने की स्थिति में किसी भी आकस्मिक आगजनी का असर केवल संबंधित परिसर तक सीमित नहीं रहने की आशंका रहती है।
पटाखों में प्रयुक्त ज्वलनशील सामग्री के कारण आग लगने की स्थिति में आसपास के मकानों,दुकानों और लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। विशेष चिंता तब बढ़ जाती है,जब भंडारण स्थल के आस-पास पर्याप्त दूरी, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकासी की सुविधा उपलब्ध न हो।
नियमों की अनदेखी तो जिम्मेदारी किसकी?
पटाखों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित लाइसेंस,सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक अनुमति का पालन आवश्यक है। ऐसे में यदि किसी रिहायशी क्षेत्र में बिना वैध अनुमति या निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत पटाखों का भंडारण हो रहा है,तो संबंधित विभागों द्वारा स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच की जरूरत है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि किसके संरक्षण में ऐसा अवैध भंडारण चल रहा है और जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी है या नहीं?
हादसे के बाद कार्यवाही नहीं,पहले रोकथाम जरूरी
पटाखा भंडारण से जुड़ी लापरवाही का सबसे बड़ा खतरा यही है कि प्रशासनिक कार्यवाही अक्सर किसी घटना के बाद दिखाई देती है। जबकि ऐसे मामलों में पूर्व निरीक्षण,लाइसेंस की जांच,अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का सत्यापन और नियमों का उल्लंघन मिलने पर तत्काल कार्यवाही अधिक प्रभावी उपाय हैं।
प्रशासन,पुलिस,नगर निकाय और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से रिहायशी क्षेत्रों में पटाखों के संभावित अवैध भंडारण की जांच करें। जान-माल की सुरक्षा किसी भी अवैध व्यापारिक गतिविधि से ऊपर है। समय रहते जांच और कार्यवाही होती है तो संभावित हादसे को टाला जा सकता है…



