झीरम घाटी हत्याकांड: 10 दोषियों को फांसी के बाद भी 27 आरोपी फरार,शेष अभियुक्तों पर फैसला होना बाकी…

खरसिया/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में विशेष एनआईए अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने और 16 सितंबर 2026 को उन्हें मृत्युदंड दिए जाने के बाद भी मामले की पूरी कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) के न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार, इस प्रकरण में फरार आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रही है और उनके विरुद्ध न्यायिक कार्यवाही उनके पकड़े जाने अथवा कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। NIA के अनुसार हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। मृतकों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राजनीतिक कार्यकर्ता,आम जनता और सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। मामले की जांच बाद में NIA ने अपने हाथ में लें प्रकरण दर्ज किया।
10 दोषियों को मिल चुकी है सजा
विशेष NIA अदालत, जगदलपुर ने सितंबर 2026 में मामले में विचारण का सामना कर रहे 11 मे से 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। इसके बाद 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
हालांकि, यह फैसला मामले में नामजद सभी आरोपियों के संबंध में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 2014 में नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था और 2015 में 30 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया। फरार आरोपियों के संबंध में आगे की जांच जारी रही।
फरार आरोपियों की सूची में 27 नाम
न्यायालयीन विवरण में फरार



अभियुक्तों के रूप में नाम दर्ज हैं।
इन सभी के विरुद्ध प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट,विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराएं लगाई गई हैं। मूल FIR दरभा थाना में अपराध में दर्ज हुई थी।
न्यायिक प्रक्रिया अभी भी महत्वपूर्ण चरण में
झीरम घाटी मामला केवल 2013 की घटना से जुड़े आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फरार आरोपियों की स्थिति भी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालिया अदालती कार्यवाही के दौरान सामने आए विवरणों के मुताबिक,आरोपपत्र में नामजद कई लोग लंबे समय से फरार रहे हैं, जबकि कुछ नाम बाद में आत्मसमर्पण या अन्य परिस्थितियों के कारण अलग स्थिति में आए।


इसलिए 10 आरोपियों को मिली सजा और शेष फरार अभियुक्तों के खिलाफ लंबित कार्यवाही को अलग-अलग न्यायिक चरणों के रूप में देखा जाना चाहिए। फरार आरोपियों के संबंध में अदालत का अंतिम निर्णय तभी संभव होगा, जब उनके विरुद्ध कानूनन आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो।
13 साल बाद भी जारी है झीरम की न्यायिक प्रक्रिया

झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सुरक्षा इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में रहा है। 13 वर्षों से अधिक समय बाद 10 आरोपियों के खिलाफ आया फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन फरार अभियुक्तों के मामले में जांच और कानूनी कार्यवाही का आगे बढ़ना अभी शेष है।

NIA का न्यायालीन रिकॉर्ड भी फरार आरोपियों के संबंध में आगे की जांच जारी रहने की बात…

कांग्रेस के अलावा पीड़ित परिवार कई बिन्दुओं को लेकर न्यायालीन लड़ाई के पथ पर आगे बढ़ने के लिए विधी जानकारों से सलाह मशवरा करने की बाते निकलकर आया है वहीं अभियुक्त के परिजनों ने भी न्यायालय के फैसले अपने पक्ष में ना आने और समर्पण कर चुके बड़े नक्सलियों द्वारा मीडिया में दिए बयानों को आधार बताते हुए उन पर कार्यवाही नहीं किए जाने और अपने परिजनों के साथ हुए मृत्यु दण्ड क्षुब्ध हो न्यायालय जाने की बातें मीडिया में कहते नज़र आए…
न्याय के लिए लम्बी इन्तजार के ओर बढ़ता प्रक्रिया तब के लिए ….✍




